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भीलवाड़ा में जमीन नहीं मिली तो नीमच शिफ्ट इथेनॉल प्लांट

राजस्थान इथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2021 का नहीं मिला फायदा

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राजस्थान इथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2021 का नहीं मिला फायदा

राजस्थान इथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति-2021 का नहीं मिला फायदा

Bhilwara news : राज्य सरकार ने इथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति 2021 में संशोधन के बाद भी उद्यमियों को फायदा नहीं मिल रहा है। उद्यमियों को आवेदन के बाद भी जमीन नहीं मिली तो भीलवाड़ा के उद्यमी ने नीमच में आवेदन किया। सरकार ने आवेदन के कुछ समय बाद ही उसे 9 हैक्टेयर जमीन मुहैया करा दी। हालांकि उद्यमी अब भी चाहता है कि सरकार साथ दे तो भीलवाड़ा जिले में प्लांट लगा सकता है।

9 हैक्टेयर जमीन मिली नीमच में

भीलवाड़ा के उद्यमी महादेव गुर्जर ने बताया कि इथेनॉल प्लांट के लिए जिला उद्योग केन्द्र में आवेदन किया था। जमीन नहीं मिली। मध्यप्रदेश सरकार से सम्पर्क किया तो इस प्रोजेक्ट को स्वीकार करते हुए लगभग 9 हैक्टेयर जमीन दे दी। वही प्रतिदिन 5 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती है। उसके लिए सरकार ने स्वीकृति दे दी। गुर्जर ने बताया कि राज्य सरकार अब भी इथेनॉल प्लांट लगाने में मदद करे तो वह भीलवाड़ा में प्लांट लगा सकता है। दो अन्य उद्यमी भी प्लांट लगाने को तैयार हैं। एक ने एसटीपी प्लांट से 5 लाख लीटर पानी प्रतिदिन की मांग की।

योजना में बदलाव, लेकिन फायदा नहीं

सरकार ने 16 मार्च 2023 को आदेश जारी कर 21 दिसंबर 2021 से लागू राजस्थान इथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति 2021 में संशोधन किया था। इसका फायदा नहीं मिला। एक इथेनॉल प्रोजेक्ट के लिए कम से कम 100 करोड़ रुपए चाहिए। इस प्रोजेक्ट पर बिहार सरकार 5 करोड़ तथा उत्तरप्रदेश में 100 करोड़ के प्लांट पर 20 करोड़ का अनुदान है। राज्य सरकार ने इसे रिप्स योजना में जोड़ा, जो बंद हो गई है।

20 प्रतिशत इथेनॉल मिलावट की छूट

मंडी व्यापारी दीपक डागा ने बताया कि केन्द्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की छूट दे रखी है। देश में मांग के अनुरूप उत्पादन नहीं है। अभी पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिला रहे है। केन्द्र सरकार ने पेट्रोल इथेनॉल मिश्रण के लिए योजना लाई, लेकिन राजस्थान सरकार की योजना का फायदा नहीं मिल रहा है।

इथेनॉल का इस्तेमाल फ्यूल में

गुर्जर ने बताया कि इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर फ्यूल में इस्तेमाल किया जाता है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है, लेकिन मक्का, चावल से भी इथेनॉल तैयार किया जा सकता है। इथेनॉल उत्पादन में सबसे आगे उत्तर प्रदेश है। बिहार व मध्यप्रदेश में भी उत्पादन हो रहा है। भीलवाड़ा-शाहपुरा, चित्तौड़गढ़- निम्बाहेड़ा जिले में बड़ी मात्रा में मक्का का उत्पादन होता है। यह मक्का बाहर जा रहा है। इथेनॉल प्लांट होगा तो मक्का स्थानीय स्तर पर काम आएगा। किसानों को भी फायदा होगा। इसके लिए सरकार को सिंगल विंडो स्कीम लानी चाहिए।

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