
भीलवाड़ा. महिला उत्पीड़न न्यायालय ने परिवार पर कातिलाना हमले के साढ़े ग्यारह साल पुराने मामले में दो भाइयों को दोषी माना। दोनों को दस-दस साल की सजा सुनाई। 21-21 हजार रुपए जुर्माना अदा करने के आदेश दिए। अभियुक्तों ने बुजुर्ग की नाक काट दी थी। उसकी पत्नी और बेटे-बहू पर हमला किया। सजा पाने वालों में खजीना निवासी दिनेश व कन्हैयालाल जाट शामिल हैं।
प्रकरण के अनुसार मामला शाहपुरा जिले के खजीना का है। 21 फरवरी 2013 को खजीना के ओम प्रकाश जाट ने कोटड़ी थाने में रिपोर्ट दी कि वह परिवार के साथ घर में सोया था। तभी दिनेश अपने भाई कन्हैयालाल के साथ कुल्हाड़ी और सरिया लेकर आया। परिवादी के पिता देबीलाल पर कुल्हाड़ी से हमला किया। दूसरा वार कर नाक काट दी। परिवादी, उसकी मां और पत्नी पर भी हमला किया। पुलिस ने अभियुक्तों को गिरफ्तार कर चालान पेश किया। विशिष्ट लोक अभियोजक संजू बापना ने 15 गवाह और 23 दस्तावेज पेश कर आरोप सिद्ध किया।
कोर्ट ने बैंक से फर्जी पट्टे पर लोन लेने व किस्त नहीं चुकाने पर जायदाद नीलाम कर 87,375 रुपए हड़पने के मामले की जांच में कोतवाली थाने के तत्कालीन एसआई जयमल की लापरवाही मानी। एसआई पर कार्रवाई की अनुशंषा की। एसीजेएम-2 विकास मारग ने कहा कि आईओ से उम्मीद थी कि आरजिया पंचायत के सचिव से रिपोर्ट लेतेे। यह पाया कि सचिव ने 25 सितंबर 2010 को पट्टे के संबंध में रिपोर्ट दी। आईओ ने आरोपियों को बचाने के लिए सचिव को गवाह नहीं बनाया। परिवादी सचिव की रिपोर्ट के आधार पर कह रहा है कि सुरेंद्र को जारी पट्टा फर्जी है। केस में दूषित जांच, साक्ष्य नहीं जुटाने के आधार पर आरोपी गोपाल, सुरेंद्र व महेंद्र के विरुद्ध धोखाधड़ी व कूटरचित दस्तावेज बनाने के आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। उल्लेखनीय है कि नारायण सोनी ने रिपोर्ट में बताया कि शंकर कंगन पैलेस के संचालक गोपाल बूला ने एसबीबीजे से शाखा अधिकारी डीपी माथुर व सुरेंद्र सिंह की मिलीभगत कर लोन उठाया। पट्टा फर्जी था। लोन नहीं चुकाने पर नीलामी 23 जून 2009 को रखी। सर्वोच्च बोली 3 लाख 37,500 रुपए होने से परिवादी के हक में छूटी। इसका 84,375 रुपए तुरंत बैंक में जमा करा दिया। जायदाद के स्वामित्व का पता किया तो पट्टा फर्जी निकला।
Updated on:
24 Oct 2024 03:42 pm
Published on:
19 Jul 2024 04:15 pm
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