
उत्तम त्याग धर्म की आराधना पूजा से गूंजे जिनालय
भीलवाड़ा।
दिगम्बर जैन समाज के दशलक्षण पर्व में कई श्रावक-श्राविकाएं सौलह एवं दस उपवास पूर्ण करने की ओर बढ रहे है। जैन समाज में उपवास के दौरान किसी भी प्रकार के खाने-पीने पर पूर्ण त्याग होता है। ऐसे तपस्वियों का परिवार एवं समाज में आनंद एवं उल्लास के साथ अभिनन्दन किया जाता है। शाहपुरा वाले मानमल, विजय, अजय पाटनी ने राजुला के 10 उपवास की और बढने के क्रम में परिवार ने नाचते गाते, रत्नवृष्टि करते हुए आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मूलनायक आदिनाथ भगवान का 108 रिद्धी मंत्र से अभिषेक एवं शांतिधारा की। उपस्थित श्रावकों ने जयकारों से अनुमोदना की। ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि दशलक्षण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की आराधना की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रावकों ने अभिषेक एवं शांतिधारा की। जैन दर्शन के अनुसार दिगम्बर मुनि ही उत्तम त्याग करते है, जो कि परिवार, व्यापार एवं सांसारिक सभी संबंधों को त्याग कर मोक्ष मार्ग पर चलते है। श्रावकों के लिए आहार दान, औषधि दान, अभयदान आदि चार दान बताए गए है।
बालयति निर्यापक मुनि विद्यासागर महाराज ने सौलह कारण भावना में आचार्य भक्ति भावना पर प्रवचन में बताया कि आचार्य पद एक स्वर्ण मुकुट के समान लगता है लेकिन इसमें अन्दर की तरफ जिम्मेदारी के कांटे लगे होते है। आचार्य अनेक प्रांत के अलग-अलग भाषा बोलने वाले, अलग प्रकृति के शिष्यों को विचलित हुए बिना छोटे बच्चे को उंगली पकडकर लेकर चलने के समान, मोक्ष मार्ग पर चलाते है। महाराज ने बताया कि आचार्य के 36 गुण होते है, जिनमें से मुख्य आठ गुण-आचारवान, आधारवान, व्यवहारवा, प्रकर्ता, अपाय-उपायदर्शी, अवपीडक, अपरिश्रावी और निर्यापक माने गए है।
शास्त्रीनगर स्थित पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि मूलनायक पाश्र्वनाथ भगवान पर 108 रिद्धि मंत्रो से अभिषेक व शांतिधारा गुमानमल, पुष्पा, गौरव, गर्वित चौधरी तथा दूसरी और सोभागबाई, राजेंद्र कुमार, रोहित बाकलीवाल ने की है। चौधरी ने बताया कि विजय झांझरी व अशोक ठोलिया के 10 उपवास करने के उपलक्ष्य में समता महिलामण्डल, पाश्र्वनाथ महिलामण्डल, जैन महिला जागृति, जूनियर जैन महिला जागृति मंडल की ओर से मंदिर में दोपहर दो बजे विनतियो का आयोजन किया गया।
बापू नगर स्थित पदमप्रभु दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष लक्ष्मीकांत जैन ने बताया कि प्रात: अभिषेक व शांतिधारा के बाद त्याग दिवस पर श्रावक श्राविकाऐ ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। दिन में महिलाओं की रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की। प्रथम रिद्धिका जैन, दिव्यांशी जैन, द्वितीय श्वेता पाटनी, प्रियल जैन एवं तृतीय मोना पाटनी, मिल्की कासलीवाल विजेता रहे।
शास्त्रीनगर स्थित सुपाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पं. आनंद शास्त्री ने बताया कि निज शुद्धात्मा के ग्रहण पूर्वक परद्रव्यों में ममत्व, एकत्व रूप, मोह, राग, द्वेष रूप विकारी भावों का छोडऩा ही वास्तविक उत्तम त्याग धर्म है। मीडिया प्रभारी भागचन्द पाटनी ने बताया कि छगनलाल, राहुल, ममुक्ष सेठिया ने शांतिधारा की। दशलक्षण मंडल विधान के तहत उत्तम त्याग धर्म के अर्घ अर्पित गए। दोपहर में आनंद शास्त्री के सानिध्य में तत्वार्थ सूत्र का वाचन, सामायिक, प्रतिक्रमण शास्त्र स्वाध्याय किया गया। सांयकाल आरती की गई। महावीर दिगम्बर जैन सेवा समिति के तत्वावधान में भजन, भक्ति का आयोजन हुआ।
सुभाषनगर स्थित नेमिनाथ मंदिर में १08 रिधिमंत्रो से अभिषेक व शान्तिधारा प्रेमचन्द, जम्बू भैसा व अंजू, लोकेश अनिभव पाटनी ने की। खास बात यह रही कि इस मंदिर में ५१ भगवान पर एक साथ सभी ने त्याग धर्म पर शान्तिधारा की। मीडया प्रभारी लोकेश पाटनी ने बताया कि शाम को आठ थाल में 48 दीपक से भक्तामर आरती रितिक शास्त्री के सानिध्य में हुई।
Published on:
17 Sept 2021 09:18 pm

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