
नेमिनाथ भगवान के चचेरे भाई थे श्रीकृष्ण
भीलवाड़ा .
जैन धर्म ने कृष्ण को उनके त्रैषठ शलाका पुरुषों में शामिल किया है, जो नौ वासुदेव में से एक है। 3112 ईसा पूर्व हुए भगवान श्रीकृष्ण एक राजनीतिक, आध्यात्मिक और योद्धा ही नहीं थे वे हर तरह की विद्याओं में पारंगत थे। भगवान श्रीकृष्ण से धर्म का एक नया रूप और संघ शुरू होता है। श्रीकृष्ण और जैनियों के 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ चचेरे भाई थे। श्रीकृष्ण के पिता वसुदेव और नेमिनाथ के पिता समुद्र विजय भाई थे।
बालयोगी निर्यापक मुनि विद्यासागर महाराज ने बताया कि जैन दर्शन में श्रीकृष्ण को अतिविशिष्ट पुरुष के रूप में चित्रित किया गया है। जैन आगमों में 63 शलाका पुरुष माने गए हैं जिनमें 24 तीर्थंकर, 12 चक्रवर्ती, 9 बलदेव, 9 वासुदेव तथा 9 प्रति वासुदेव हैं। नेमिनाथ (अरिष्ट नेमि) 22वें तीर्थंकर तथा श्री कृष्ण नौवें अंतिम वासुदेव हैं। जैन पुराणों के अनुसार श्री कृष्ण भावी तीर्थंकर हैं।
नेमिनाथ वैराग्य प्रकृति के थे। श्रीकृष्ण के प्रयास से ही नेमिनाथ का विवाह जूनागढ़ के राजा उग्रसेन की पुत्री राजमती से तय हुआ था। किन्तु जब बरात नगर सीमा पर पहुंची तो बाड़े में बंद पशुओं की चीत्कार से नेमिनाथ सिहर उठे। पूछने पर उन्हें पता चला कि बरात के भोज के लिए ये पशु बंधे हैं। इन्हें शायद अपने वध का अहसास हो गया है, इसलिए चीत्कार कर रहे हैं। यह जानकर नेमिनाथ को वैराग्य हो गया। उन्होंने अपने आभूषण उतार कर सारथी को दे दिए और कैवल्य पथ पर चल दिए। श्रीकृष्ण भी उन्हें समझाने में सफल नहीं हो सके।
नेमिनाथ ने जिस स्थान पर दीक्षा ग्रहण की थी, उसी स्थान पर उन्हें कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। श्रीकृष्ण को जब यह समाचार सुनाए तो वे अपने परिजनों एवं सहस्त्रों राजाओं के साथ हाथी पर बैठ कर नेमिनाथ का दर्शन करने गए। नेमिनाथ ने श्रीकृष्ण को निवृत्ति मार्ग पर चलने का उपदेश दिया। श्रीकृष्ण नेमिनाथ को आराध्य के रूप में स्वीकारते हैं। गीता में हिंसात्मक यज्ञ आदि का निषेध है तथा समन्वय की प्रधानता है। इधर, अहिंसा जैन धर्म का सबसे बड़ा सिद्धांत है। नेमिनाथ और श्रीकृष्ण के विचार बहुत कुछ मिलते-जुलते हैं। यह दोनों महापुरुषों के घनिष्ठ संबंध का प्रबल प्रमाण है। जैन धर्म में पूरे एक शास्त्र श्री हरिवंश पुराण ने श्रीकृष्ण के जीवन चरित्र पर लिखा है कि महापुरुष किसी संप्रदाय विशेष की धरोहर नहीं होते। उनका व्यक्तित्व तो सूर्य-चंद्रमा की भांति सार्व भौमिक होता है। उन्हें किसी परिधि मे ंसीमित करना उचित नहीं।
Published on:
30 Aug 2021 08:12 am

