
need nagadi dam reparing in bhilwara
जहाजपुर।
उपखण्ड क्षेत्र का सबसे बड़ा नागदी बांध अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। दो साल पहले जहाजपुर क्षेत्र में अतिवृष्टि के दौरान बांध की पाल का एक हिस्सा टूटने के अंदेशे मात्र से प्रशासन और जल संसाधन विभाग की सांस फूल गई थी। तब रेत के कट्टे जैसे जुगाड़ से पाल बचाई लेकिन दो साल बीतने के बावजूद उसकी सुध नहीं ली गई।
मानसून फिर चौखट पर है लेकिन पाल के हालात जस के तस हैं। पाल पर लगे पत्थर बाहर निकल आए है। पाल में बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए है। पाल के अंदर व बाहर अंग्रेजी बबूल लगे हुए है। इससे पाल खोखली होती जा रही है। इससे पाल के टूटने का अंदेशा हर साल बढ़ता जा रहा है।
जल संसाधन विभाग ने पाल की मरम्मत और नहरों की देखरेख के लिए वर्ष-2014-15 में 555 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। तीन साल में राशि नहीं मिली। विभाग इस बार भी बांध पर रेत के कट्टे रखवाने और फाटकों पर ऑयल-ग्रीस से ज्यादा कराने की हालत में नहीं है।
खाली जेब से कैसे होगी मरम्मत
वर्ष-1959 में 6 लाख 58 हजार रुपए की लागत से बांध बना। छह दशक में इसकी मरम्मत नहीं हो पाई। अभी बांध की पाल पर बबलू के पेड़ और झाडि़यां उग गई है। जगह-जगह चूहों ने बिल बना दिए। अतिवृष्टि के दौरान बांध का पानी पाल तोड़कर बाहर आने का खतरा बना रहता है। बांध की दीवार कमजोर हो गई है। यहां नहरों की स्थिति बद्दतर है। विभाग का कहना है कि खाली जेब है। एेसे में बांध की मरम्मत कैसे की जाए।
एक चौकीदार के भरोसे सुरक्षा
बांध की सुरक्षा को लेकर भी बेखयाली का आलम है। वर्ष-2002 में विभाग के पास देखरेख के लिए 25 चौकीदार, तीन कनिष्ठ अभियंता व अन्य स्टॉफ था लेकिन फिलहाल सुरक्षा एक चौकीदार के भरोसे है। वह भी छह माह बाद सेवानिवृत हो जाएगा।
इनका कहना है
बांध की मरम्मत के लिए 4 करोड़ 28 लाख 16 हजार रुपए स्वीकृत हुए है। टेंडर भी हो गया। वर्क ऑर्डर भी हो गया। लेकिन अभी मिला नही है। जल्द ही बांध पर मरम्मत का काम शुरू होगा।
रामप्रसाद मीणा, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग
नागदी एक नजर में
1959 में बना बांध
6.58 लाख रुपए आई लागत
1692 हैक्टेयर भूमि में होती है सिंचाई
19 फीट बांध की भराव क्षमता
Published on:
17 May 2018 01:15 pm
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