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नगर निकाय चुनाव में ‘दो संतान नियम’ खत्म करने की तैयारी

- पार्षद से लेकर मेयर का चुनाव लड़ने की राह होगी आसान - विधि विभाग को भेजा गया प्रस्ताव; मुख्यमंत्री जल्द ले सकते हैं अंतिम फैसला

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Preparations to end the 'two-child rule' in municipal elections

Preparations to end the 'two-child rule' in municipal elections

राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनावों से पहले राज्य सरकार एक बड़ा नीतिगत बदलाव करने की तैयारी में है। इसका सीधा असर हजारों संभावित उम्मीदवारों पर पड़ेगा। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में पार्षद सहित मेयर और सभापति के चुनाव लड़ने के लिए लागू 'दो संतान नियम' को समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार कर विधि विभाग को भेजा गया है।

यूडीएच मंत्री की पहल पर तैयार हुआ प्रस्ताव

स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास मंत्री झाबरसिंह खर्रा की पहल पर स्वायत्त शासन विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। मंत्री ने साफ संकेत दिए हैं कि सरकार दो से अधिक संतान वाले जनप्रतिनिधियों पर लगी रोक को लेकर नीति में बदलाव करने की मंशा रखती है। बदलते सामाजिक हालात और जनसंख्या के नए परिदृश्य को देखते हुए सरकार इस नियम पर पुनर्विचार कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय ले सकते हैं।

क्या है मामला

राजस्थान में पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों के लिए साल 1995 में एक नियम लागू किया गया था। इसके तहत दो से ज्यादा बच्चों वाले व्यक्ति को पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है। हालांकि, हाल ही राज्य सरकार ने कर्मचारियों की पदोन्नति में दो से अधिक संतान होने पर लगी रियायत को खत्म करने के बाद, जनप्रतिनिधियों के लिए भी इस नियम में ढील देने की मांग ने जोर पकड़ लिया था।

नेताओं और संगठनों ने की थी मांग

विभाग को सैकड़ों ज्ञापन और पत्र प्राप्त हुए हैं। इनमें शहरी निकाय और पंचायती राज संस्थाओं में दो से ज्यादा बच्चे वालों को चुनाव लड़ने से अयोग्य करने के नियम को बदलने की मांग की गई थी। मंत्री स्तर से इस मांग पर विचार करने के बाद ही प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया।

फिलहाल, विभाग की ओर से तैयार किए गए इस प्रस्ताव का विधिक परीक्षण विधि विभाग द्वारा किया जा रहा है। विधि विभाग से पास होने के बाद, इसे अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के समक्ष रखा जाएगा। संभावना है कि मुख्यमंत्री जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लेकर इस नियम को समाप्त करने की घोषणा कर सकते हैं। इससे आगामी नगरीय निकाय चुनावों में अधिक उम्मीदवारों के लिए चुनाव लड़ने का रास्ता खुल जाएगा।

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