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प्रोसेस हाउस-फैक्ट्रियों के प्रदूषित पानी का नया सच: सफेद झूठ बनकर बह रहा काला पानी

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प्रोसेस हाउस-फैक्ट्रियों के प्रदूषित पानी का नया सच: सफेद झूठ बनकर बह रहा काला पानी

भीलवाड़ा।

प्रोसेस हाउस मालिकों का दावा झूठा साबित हो गया। फैक्ट्रियों से निकला प्रदूषित काला पानी नालों में होता हुआ गुवारड़ी बांध तक पहुंच रहा है। फैक्ट्रियों से निकला घातक रसायनों से युक्त पानी जहां-जहां से बहकर जा रहा है, उस राह में आने वाले खेतों में बर्बादी का कहर बरपा रहा है। जो काला पानी सरकारी अफसरों को नजर नहीं आता, आखिर उसका रास्ता पत्रिका टीम ने ढंूढ निकाला।

वस्त्रनगरी के आस-पास दर्जनों गांवों के ग्रामीणों की सेहत में जहर घोल रहे काले पानी का सच उजागर करने के लिए पत्रिका टीम ने गुवारड़ी बांध में नाव उतारकर तीन किलोमीटर तक पेटा क्षेत्र को खंगाला, तो यह चौंकाने वाला सच सामने आया। वस्त्रनगरी में कई कपड़ा फैक्ट्रियां व प्रोसेस हाउस रसायनयुक्त पानी छोड़ रहे हैं। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की सख्त मनाही के बावजूद खाली पड़ी जमीनों, नाले व बांधों तक में काला पानी छोड़ा जा रहा है। इससे आस-पास के 25 गांवों के हजारों बीघा खेत बंजर हो चुके हैं। हैंडपंप और कुओं का पानी तक काला हो गया है। सब्जियों का स्वाद बदल गया है। लोग खेती करना बंद कर पलायन करने को मजबूर होने लगे हैं। जहरीले काले पानी के हालात पर पत्रिका रिपोर्टर नरेन्द्र वर्मा, जसराज ओझा व अरविंद हिरण की रिपोर्ट-

एक किमी तक गाड़े पाइप, दिन में भी छोड़ रहे पानी


क्या देखा: काला पानी प्रोसेस हाउस से कैसे निकलता है, यह देखने के लिए सबसे पहले गुवारड़ी रोड पर पहुंचे। वहां एक प्रोसेस हाउस के पास नाले में काला पानी छोड़ रखा था। करीब एक किलोमीटर तक उस काले पानी के सहारे चलने पर पता चला कि एक प्रोसेस हाउस संचालक ने जमीन में पाइप दबाकर नाले तक छोड़ रखे थे। यह पानी रात में ज्यादा मात्रा में आता है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां काला पानी बह रहा था, वहां जलदाय विभाग की पाइपलाइन भी थी। लीकेज होने पर उस पाइपलाइन में गया काला पानी लोगों के लिए जानलेवा हो सकता है। बांध पर काम करने वाले चम्बल पेयजल परियोजना व मत्स्य ठेकेदार के कर्मचारियों ने भी काला पानी बांध में आने की पुष्टि की।


नाव में बैठकर गुवारड़ी बांध को किया पार


क्या देखा: प्रोसेस हाउसों का काला पानी गुवारड़ी नाले में देखने के बाद पता चला कि गुवारड़ी बांध में भी काला पानी आ रहा है। बांध का पानी भीलवाड़ा शहर के लोग पीते भी है और खेती भी होती है। किसी ने बताया कि बांध के उस छोर पर बीलिया की ओर से काला पानी आता है, लेकिन वहां जाने का रास्ता नहीं है। इस पर बांध में मछली पालन करने वाले शमशाद व अय्यूब की मदद से नाव में सवार होकर बांध को पार किया। करीब तीन किलोमीटर आगे हालात डराने वाले थे। वहां आटूण नाले से प्रदूषित काला पानी बांध में मिल रहा था। पानी में दुर्गंध थी। पता चला कि कुछ लोग पहले वहां खेती करते थे, लेकिन पानी खराब होने से बंद कर दी।


यह है नियम


प्रोसेस हाउस प्रदूषित पानी बाहर नहीं छोड़ सकते। चारदीवारी से बाहर प्रदूषित पानी छोडऩे पर कंसेंट टू ऑपरेट तक निरस्त करने का प्रावधान है, लेकिन ऐसा होता नहीं है।


न्यायालय पहुंचा मामला

शहर के निकट रीको ग्रोथ सेंटर में जो कपड़ा फैक्ट्रियां व प्रोसेस हाउस हैं, इनसे प्रदूषित पानी निकलता है। यह पानी चोरी-छिपे बनास नदी, गुवारड़ी नाले व गुवारड़ी बांध में छोड़ा जा रहा है। यह मामला न्यायालय में भी पहुंच गया। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कुछ नहीं कर रहे।

टीम भेज जांच कराई जाएगी

प्रोसेस हाउस अभी भी काला पानी छोड़ रहे हैं, तो गलत है। यह पानी गुवारड़ी बांध तक आ रहा है, तो समस्या विकराल हो सकती है। टीम भेज जांच कराई जाएगी।
राजीव पारीक, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल

जनहित के कार्य में समझौता नहीं होना चाहिए

काले पानी को बाहर छोडऩे पर रोक है। कोई भी प्रोसेस हाउस प्रदूषित पानी बाहर छोड़ रहा है, तो संबंधित विभाग को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। जनहित के कार्य में समझौता नहीं होना चाहिए। सरकार ने इस संबंध में स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर रखी है।
दामोदर अग्रवाल, अध्यक्ष, भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फैडरेशन

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