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प्रदेशभर में आंदोलन की आहट: मंत्रालयिक कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

राजस्थान मंत्रालयिक कर्मचारी परिषद के बैनर तले अपनी बरसों पुरानी लंबित मांगों को लेकर मंत्रालयिक संवर्ग और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने हुंकार भरी है। भीलवाड़ा जिला मुख्यालय पर परिषद के जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र कंठ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए कार्मिकों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा जाहिर की। […]

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Ministerial employees opened a front and submitted a memorandum to the Chief Minister.

Ministerial employees opened a front and submitted a memorandum to the Chief Minister.

राजस्थान मंत्रालयिक कर्मचारी परिषद के बैनर तले अपनी बरसों पुरानी लंबित मांगों को लेकर मंत्रालयिक संवर्ग और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने हुंकार भरी है। भीलवाड़ा जिला मुख्यालय पर परिषद के जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र कंठ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए कार्मिकों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा जाहिर की। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते उनकी मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

वेतन विसंगति और पदोन्नति का मुद्दा गरमाया

परिषद के पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि मंत्रालयिक कर्मचारियों को वर्तमान में पदोन्नति और वेतनमान के मोर्चे पर कई व्यावहारिक कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं। मुख्य मांगों में मंत्रालयिक संवर्ग की द्वितीय पदोन्नति के पद 'सहायक प्रशासनिक अधिकारी' की ग्रेड पे की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। इसके अलावा, संवर्ग के अंतिम पद 'संस्थापन अधिकारी' के ऊपर 'उप सचिव' का नया पद सृजित करने की मांग की गई है।

शिक्षा विभाग और योग्यता में बदलाव की मांग

ज्ञापन में कनिष्ठ सहायक की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक करने और काफी समय से लंबित निदेशालय गठन की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया है। कर्मचारियों ने सुझाव दिया है कि शिक्षा विभाग में बजट तैयार करने का कार्य ब्लॉक स्तर के बजाय सीधे निदेशालय स्तर पर हो, जिससे समय और धन के दुरुपयोग को रोका जा सके। साथ ही, प्रत्येक उच्च माध्यमिक विद्यालय में सुचारू कामकाज के लिए कम से कम तीन मंत्रालयिक पदों की स्वीकृति मांगी गई है।

'रिटायरमेंट डे' पर भुगतान की मांग

परिषद ने सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के हितों को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। मांग की गई है कि: सेवानिवृत्ति के दिन ही समस्त परिलाभों का भुगतान सुनिश्चित हो। उपार्जित अवकाश, राज्य बीमा, भविष्य निधि और ग्रेच्युटी में कोई देरी न हो। ज्ञापन के दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश सेन, उपाध्यक्ष अशोक शर्मा, संगठन मंत्री आनन्द बाबू शर्मा, कोषाध्यक्ष मुकेश पाराशर, महामंत्री विक्रम बाकलीवाल, मुकेश जीनगर, राजेन्द्र चौहान, विनोद सोनी और राकेश विश्नोई मौजूद रहे।