
अजमेर में स्थित हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 806 वां उर्स 14 मार्च से शुरू होगा। परंपरा के अनुसार इस दिन भीलवाड़ा का गौरी परिवार बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाने की रस्म अदा करेगा।
भीलवाड़ा।
अजमेर में स्थित हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 806 वां उर्स 14 मार्च से शुरू होगा। परंपरा के अनुसार इस दिन भीलवाड़ा का गौरी परिवार बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाने की रस्म अदा करेगा। इसके साथ ही उर्स की औपचारिक शुरुआत होगी।
उर्स में झंडा चढाने के लिए सोमवार सुबह गत 74 वर्षों की भांति इस वर्ष भी भीलवाड़ा के गुलमण्डी खारा कुआं के पास से फकरूद्दीन गौरी परिवार के चालीस सदस्य झंडा लेकर रवाना हुुुुआ। यह जानकारी देते हुए गौरी परिवार के फकरूद्दीन गौरी ने बताया कि भीलवाड़ा से झंडा लेकर अजमेर शरीफ में हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में पहुंचने के बाद वहां 14 मार्च को झंडा चढाने की रस्म अदा की जाएगी।
यह रस्म फकरूद्दीन गौरी द्वारा सैय्यद अबरार अहमद की सदारत में 25 तोपों की सलामी के साथ पूरी की जाएगी। झंडा ले जाने के दौरान फकरूद्दीन गौरी के साथ अब्दुल लतीफ, बख्तयार अहमद, दाउद हुसैन, अब्दूल रहुफ, मोहम्मद रफी, मोसीन, मोहम्मद फेजल, तोकिर अहमद सहित 40 गोरी परिवार के सदस्य रवाना हुए।
74 सालों से निभा रहे रस्म
उर्स पर झंडा चढ़ाने की यह रस्म गौरी परिवार 74 सालों से निभा रहा है। गौरी परिवार के फखरुद्दीन ने बताया कि अजमेर दरगाह के बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ाने की रस्म के बाद ही असर की नमाज होगी। इससे पूर्व गेस्ट हाउस से झंडे का जलसा रवाना होगा। फखरुद्दीन गौरी ने बताया कि उर्स का झंडा चढ़ाने की परंपरा वर्ष 1928 में पेशावर के सैय्यद अब्दुल सत्तार बादशाह जान ने शुरू की। उनके बाद लाल मोहम्मद गौरी ने 1944 से इस परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने 1991 तक रस्म निभाई। उनके बाद मोइनुद्दीन गौरी ने 2006 तक इस परंपरा को निभाया। इसके बाद वे इस रस्म को निभा रहे हैं।
सूफियाना कलाम के साथ 25 तोपों की दी जाएगी सलामी
झंडे की रस्म शाम लगभग 5 बजे शुरू होगी। झंडे का जलसा दरगाह गेस्ट हाउस से गली लंगर खाना एवं निजाम गेट होते हुए दरगाह बुलंद दरवाजा पहुंचेगा। इस दौरान सूफियाना कलाम के साथ ही 25 तोपों की सलामी दी जाएगी।
Updated on:
12 Mar 2018 02:11 pm
Published on:
12 Mar 2018 02:09 pm

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