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अनूठी परंपरा: यहां हुई गधों की पूजा, भड़काए बैल

दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट के दिन प्रतापनगर में गधों की पूजा होती है

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मांडल में अन्‍नकूट के द‍िन गधों की पूजा करते अतिथि

मांडल।
भीलवाड़ा जिले के कस्बे में दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट के दिन प्रतापनगर में गधों की पूजा होती है। यहां गधों को नहला धुलाकर सजा धजा कर लाया जाता है। प्रतापनगर में चौक में उनकी पूजा अर्चना के बाद आरती उतारी गई। इसके बाद उन्हें भड़काया गया। इसे देखने के लिए कस्बे सहित भीलवाड़ा, करेड़ा, भगवानपुरा, बागौर व आस—पास के गांवों के लोग जमा हुए।

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मांडल कस्बे में दीपावली के अगले दिन अन्नकूट पर वर्षो से चली आ रही बैल व गधों को भड़काया गया। जिससे ग्रामीणों का भरपूर मनोरंजन रहा। गणेश सेवा समिति प्रताप नगर के तत्वावधान में कुम्हार समाज के सहयोग से गधे भड़काए गए। नायब तहसीलदार सोहन लाल कुम्हार, बिरदीचंद कुम्हार ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर गधों को मुंह मीठा कराया। साथ ही कस्बे के जाटों का मोहल्ला, मालियों का मंदिर, मठ मन्दिर, तीज की बावड़ी, नई नगरी में बेल भड़काए गए। दशहरा नाहर नृत्य उत्सव कमेटी के तत्वावधान में बैल लेकर आए 51 गो पालको को तगारिया वितरित की गई।

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वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन
ग्रामीणों के अनुसार बैसाखनंदन पूजन की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। जिसे देखने के लिए हजारों लोग जमा होते है। ग्रामीण अपने रिश्तेदारों को यह देखने के लिए बुलाते हैं।

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गधों की कमी से आ रही है परेशानी
समय के साथ—साथ अब गधों की संख्या कम होती जा रही है। जिससे परंपरा का निर्वहन करने में परेशानी आ रही है। पहले जहां गधों की संख्या सौ से अधिक होती थी वहीं अब गिनती के गधे रह गए हैं। पूजन के लिए दूसरी जगहों से गधे मंगवाए जाते हैं।

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