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सलारपुर 220 केवी जीएसएस, नए वित्तीय वर्ष की स्वीकृति, पकड़ेगा रफ्तार

भिवाड़ी. सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र में 220 केवी जीएसएस निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृति मिली हुई है। एक अप्रेल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में सलारपुर जीएसएस का निर्माण तेजी पकड़ेगा। सलारपुर में 220 केवी जीएसएस की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति (एएंडएफ) मई 2025 में मिल चुकी है। वित्तीय स्वीकृति […]

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भिवाड़ी

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Dharmendra dixit

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Dharmendra Dixit

Mar 31, 2026

रीको ने चिन्हित की 50 हजार वर्गमीटर भूमि, प्रसारण निगम जमा कराएगा जीएसटी

भिवाड़ी. सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र में 220 केवी जीएसएस निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृति मिली हुई है। एक अप्रेल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में सलारपुर जीएसएस का निर्माण तेजी पकड़ेगा। सलारपुर में 220 केवी जीएसएस की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति (एएंडएफ) मई 2025 में मिल चुकी है। वित्तीय स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी हुई थी। मई में एएंडएफ मिलने के बाद प्रसारण निगम ने जीएसटी का पैसा रीको में जमा नहीं कराया है। एएंडएफ अगली वित्तीय वर्ष के लिए निकली थी इसलिए चालू वित्तीय वर्ष में कोई बजट नहीं मिला। इस कारण रीको में जीएसटी जमा नहीं हुई। जीएसटी जमा नहीं होने से जमीन का कब्जा भी नहीं मिला। प्रसारण निगम के अनुसार एएंडएफ अगले वित्तीय वर्ष के लिए निकली है।

जमीन चिन्हित, प्रसारण नहीं ले सका कब्जा
करीब 72 करोड़ रुपए से 220 केवी जीएसएस का निर्माण होगा। रीको ने 50 हजार वर्गमीटर जमीन दी है। निगम रीको को जीएसटी का 6.48 करोड़ रुपए देगा। प्रसारण निगम ने जीएसएस निर्माण के लिए डीपीआर तैयार कराई है। तकनीकि प्रस्ताव स्वीकृत कराए जाएंगे। प्रस्तावित जीएसएस में 160 एमवीए का एक और 50 एमवीए के दो ट्रांसफार्मर होंगे। रीको ने 50 हजार वर्गमीटर भूमि आवंटित करने के लिए प्रसारण निगम को जनवरी 2025 में मांग पत्र सौंपा था। मांग पत्र की राशि जमा होने के बाद रीको जमीन आवंटित करती है। प्रसारण निगम अधिकारियों ने बताया कि रीको ने जीएसटी जमा कराने के लिए जो मांग पत्र दिया, उसका प्रस्ताव निगम स्तर पर भेजा गया। मुख्यालय ने रीको को जीएसएटी जमा कराने के साथ जीएसएस निर्माण की भी एएंडएफ स्वीकृति दी। जमीन का कब्जा मिलने के बाद जीएसएस निर्माण के लिए तकनीकि प्रस्ताव बनाकर स्वीकृत कराया जाएगा, इसके बाद टेंडर लगेगा।

नई इकाइयां आईं, 78 मेगावाट की जरूरत
प्रसारण निगम को सलारपुर में जीएसएस निर्माण प्रक्रिया में तेजी लानी होगी क्योंकि राइजिंग राजस्थान समिट और उससे पूर्व सलारपुर औद्योगिक क्षेत्र में बड़े निवेशक आए हैं, जबकि यहां पर बिजली आपूर्ति का तंत्र विकसित नहीं है। ऐसी स्थिति में नई इकाइयों के सामने समस्या खड़ी हुई है। उत्पादन शुरू करने से पहले फैक्ट्री प्लांट निर्माण के लिए भी अस्थायी कनेक्शन देने तक की सुविधा नहीं है। सलारपुर नव विकसित औद्योगिक क्षेत्र है, कई बड़ी कंपनियां यहां आ चुकी हैं। कंपनियां अधिक भार के विद्युत कनेक्शन मांग रहीं हैं लेकिन रीको और विद्युत निगम का तंत्र यहां कमजोर है जिसकी वजह से कनेक्शन नहीं दिए जा रहे। रीको की विद्युत शाखा के अधीक्षण अभियंता के अनुसार सलारपुर में 78 मेगावाट से अधिक बिजली की जरूरत यहां स्थापित होने वाली इकाइयों को होगी। इस तरह वर्तमान और भविष्य में बिजली आपूर्ति के लिए यहां 220 केवी जीएसएस की जरूरत है।

क्षेत्र में होंगे चार बड़े जीएसएस
सलारपुर में 220 केवी का चौथा जीएसएस निर्मित होगा। यहां पर जीएसएस निर्माण की प्लानिंग को रीको प्रबंधन ने जनवरी में स्वीकृति दी। जीएसएस निर्माण के लिए 50 हजार वर्गमीटर जमीन चिन्हित की गई है। भिवाड़ी उद्योग क्षेत्र में बिलाहेड़ी, खुशखेड़ा और कारोली 220 केवी जीएसएस हैं। सलारपुर में 220 केवी जीएसएस निर्मित होने के बाद क्षेत्र का चौथा जीएसएस होगा। कारोली और सलारपुर में बड़ा पावर हाउस निर्मित होने के बाद क्षेत्र में दो दशक के लिए बिजली आपूर्ति की सुविधा उद्यमियों को मिल सकेगी। बिजली कटौती, ट्रिपिंग, ओवरलोडिंग की समस्या दूर होगी। क्षेत्र में जीएसएस निर्माण की मांग लंबे समय से थी। बजट में भी सलारपुर को मॉडल औद्योगिक क्षेत्र बनाने की घोषणा हो चुकी है, इसके बावजूद यहां होने वाले बिजली तंत्र के सुदृढ़ीकरण के कार्य लंबित चल रहे थे।

वित्तीय स्वीकृति एक अप्रेल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष की है। जीएसटी जमा करा भूमि का कब्जा लेने के साथ ही निर्माण प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
महीपाल यादव, एसई, प्रसारण निगम

प्रसारण निगम को जनवरी 2025 में मांगपत्र दिया गया। अक्टूबर 2025 में पॉलिसी बदल गई, एक रूपए की जगह प्रिवलिंग रेट पर आवंटन का नियम आ गया। प्रिवलिंग रेट 7200 रुपए से बढक़र 10300 रुपए हो गई। इस तरह निगम को जमीन आवंटन के लिए 60 करोड़ रुपए देने पड़ते। अब पुरानी पॉलिसी से ही आवंटन होगा।
मांग पत्र का समय निकल गया था, दोबारा उसकी स्वीकृति मांगी गई है।
अखिल अग्रवाल, यूनिट हेड, रीको