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आखिर क्यों आता है? पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस भारत से पहले

भारत और पाकिस्तान दोनों देश एक ही दिन आजाद हुए थे, लेकिन पाकिस्तान को अपने पहले पते पर ऐतराज था।

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pakistan Independence Day

भोपाल। अंग्रेजों की गुलामी से भारत और पाकिस्तान दोनों एक साथ ही आजाद हुए, इसके बावजूद पाकिस्तान द्वारा अपना स्वतंत्रता दिवस भारत से एक दिन पहले मनाया जाता है। कई बार बच्चों से लेकर युवाओं तक के दिमाग में ये प्रश्न कौंधता है कि इसका क्या कारण है।

इतना ही नहीं मध्यप्रदेश में एक ऐसा शहर भी है जहां आजादी के समय पाकिस्तान का झंडा फहराया गया था, इसकी भी एक अजीबो—गरीब कहानी है।

दरअसल भारतीय इतिहास में 15 अगस्त, 1947 वो तारीख है जब हमारा देश ब्रिटिश हुकूमत से आजाद हुआ था। ठीक, इसी दिन हमारा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान बना। जहां, भारत से एक दिन पहले ही यानी 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।

किसे मिली थी पहले स्वतंत्रता
जानकारों के अनुसार हुआ कुछ इस तरह था कि ब्रिटिश हुकूमत ने भारतीय स्वतंत्रता विधेयक में 15 अगस्त 1947 की तारीख दोनों देशों की दी थी। साथ ही इस अधिनियम में जारी किए गए पहले स्टाम्प में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में उल्लेख किया।
इस मामले में पाकिस्तान को अपने पहले पते पर ऐतराज था उस समय जिन्ना ने कहा था, '15 अगस्त पाकिस्तान के स्वतंत्र और संप्रभु राज्य का जन्मदिन है। और यह मुस्लिम राष्ट्र के भाग्य की पूर्ति का प्रतीक है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में अपनी मातृभूमि बनाने के लिए महान त्याग किए हैं।'
पाकिस्तान ने 14 अगस्त, 1947 को करांची में सत्ता के हस्तांतरण का आयोजन किया था। इस दौरान 14 अगस्त, 1947 को मुस्लिमों की एक बहुत ही पवित्र तारीख रमजान का 27वां स्थान दिया गया, इसलिए पाकिस्तान में 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा।

भारत में यहां आजादी के समय फहराया गया था पाकिस्तानी झंडा:
आजादी से पहले और बाद भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह किसी भी हालत में भारत के साथ अपनी रियासत का विलय नहीं करना चाहते थे। उन्होंने एकीकरण के एग्रीमेंट पर साइन करने से मना कर दिया था। पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना के काफी करीबी होने के कारण उन्हें भारत सरकार पर दबाव बनाने में मदद मिल रही थी। जब दोनों देशों के आजादी की तारीख घोषित हो गई तो 14 अगस्त को भोपाल में पाकिस्तान का झंडा फहराया गया।

इतिहासकारों के मुताबिक भोपाल में 1936 से जोरदार तरीके से स्वतंत्रता संग्राम शुरू हो गया था। नवाब की सेना आए दिन इस आंदोलन को कुचलती थी। नवाब अंग्रेजों के इतना ज्यादा करीबी था कि जरा सी बात पर आंदोलन से जुड़े लोगों को जेल में डाल देता था।

आजादी के दो साल बाद तक यहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर जमकर अत्याचार हुए। वहीं देश के आजाद होने के बाद भी यहां के लोग अपने देश का झंडा नहीं फहरा सकते थे।

भारत की आजादी के दिन जैसे-तैसे लोगों ने नवाबी सेना को चकमा देकर यहां के जुमेराती पोस्ट अॉफिस के पास तिरंगा फहरा दिया। इससे पहले यहां के नवाब समर्थक लोगों ने 14 अगस्त 1947 को भोपाल में कई जगह पाकिस्तान का झंडा फहराया था। इस घटना के बाद पूरी रियासत में तनाव रहा और ऐसा अनेक बार हुआ।

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