
MP's 427 km long river will remain full of water
Ken River - भीषण गर्मी के कारण जब मार्च-अप्रेल में ही नदियां सूखने लगी हैं तब यह खबर लोगों को राहत दे सकती है। मध्यप्रदेश में नदियों को सूखने से बचाने और सालभर पानी से लबालब बनाए रखने के लिए राज्य सरकार कई जतन कर रही है। इसके लिए नदियों को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट्स चलाए जा रहे हैं। केन और बेतवा नदियों को जोड़ा जा रहा है जिससे प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका हमेशा के लिए जलसंकट से मुक्त हो जाएगा। कुल 44 हजार 605 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट से एमपी में बुंदेलखंड के 10 जिलों को भरपूर पानी मिलेगा।
करीब 24 हजार स्क्वायर किलोमीटर में फैले बुंदेलखंड की केन और बेतवा दो सबसे बड़ी नदियां हैं। इसके बावजूद इलाके में जल संकट बना रहता है। इसे दूर करने के लिए केन और बेतवा को एक नहर के माध्यम से जोड़ने की परियोजना पर काम चल रहा है।
427 किमी लंबाई में बहती है केन
केन नदी का उद्गम मध्यप्रदेश के कटनी ज़िले में विंध्याचल की कैमूर पर्वतमाला में है। पन्ना में इससे कई धाराएं आकर जुड़ती हैं। यूपी के बांदा ज़िले में यह यमुना से मिल जाती है। इस दौरान केन, दोनों राज्यों में करीब 427 किमी का सफर तय करती है। केन को बेतवा से जोड़ने से पानी की बर्बादी पूरी तरह रुक जाएगी। केन नदी सालभर पानी से लबालब बनी रहेगी।
प्रोजेक्ट में छतरपुर जिले में दौधन बांध का निर्माण किया जाएगा। यह बांध खजुराहो के पास पन्ना जिले की सीमा पर केन नदी पर बनाया जाएगा। दौधन बांध से 230 किलोमीटर लंबी नहर के माध्यम से केन और बेतवा नदियों को जोड़ा जाएगा। एमपी के निवाड़ी में केन और यूपी के झांसी जिले की सीमा पर ओरछा के करीब बेतवा नदी को जोड़ा जाएगा।
एमपी के 10 जिले होंगे लाभान्वित
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से एमपी के 10 जिले- निवाड़ी, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन जिले लाभान्वित होंगे। यूपी के भी 4 जिलों में पानी पहुंचेगा। दोनों राज्यों के 9.5 लाख किसानों की 10 लाख हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई की जा सकेगी। इसके साथ ही 62 लाख लोगों के लिए पेयजल का संकट भी समाप्त हो जाएगा।
Updated on:
08 Apr 2025 09:05 pm
Published on:
08 Apr 2025 08:47 pm
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