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कबीर भजन और सूफीयाना कलाम से दिया प्रेम का संदेश

रवींद्र भवन में मप्र के 63वें स्थापना दिवस का समापन...

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kabir bhajan

कबीर भजन और सूफीयाना कलाम से दिया प्रेम का संदेश

भोपाल। रवीन्द्र भवन में चल रहे दो दिवसीय मप्र स्थापना दिवस समारोह का शुक्रवार को समापन हो गया। अंतिम दिन जहां कबीर-मीरा के भजन ने श्रोताओं को भक्ति रस में डूबो दिया तो अमीर खुसरो और सूफियाना कलामों ने कला रसीकों को शास्त्रीयता के रंग में रंग दिया।

इसी के साथ मध्य प्रदेश की परंपरा को दिखाती लोक नृत्य की विभिन्न विधाओं को कलाकारों ने प्रस्तुति किया। इस दौरान बरेदी, मटकी, गणगौर, गुदुमबाजा और बैगा-परधौनी जैसे नृत्यों की प्रस्तुति हुई।

ऐ री सखी मोरे पिया घर आए...
नई दिल्ली से आई ग्वालियर घराने की गायिका मीता पंडित ने उपशास्त्रीय गायन पेश किया। उन्होंने मिया तानसेन कंपोजिशन से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसे उन्होंने खुद तैयार किया है।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने तीन ताल में एक तराना ऐ री आली आज शुभ दिन... पेश किया। इसके बाद राग यमन प्रस्तुति दी और फिर पहाड़ी ठुमरी पिया गए परदेस... की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए कलारसिकों को उन्होंने हजरत अमीर खुसरो की रचना 'ऐरी सखी मोरे पिया घर आए... सुनाकर भाव विभोर कर दिया। उनकी इस प्रस्तुति से कार्यक्रम में संगीत की लहर सी दौड़ गई। वहीं, बाबा फरीद का एक सूफियाना कलाम मेण्डा इश्क वी तू... से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम के अगले चरण में गुजरात के लोक गायक मूरा लाल ने अपने लोक गायन की शुरुआत गणपति वंदना से की। फिर उन्होंने गुरु वंदना मैं वारी जाऊं... सुनाया। मीरा भजन मन लागो फकीरी में के बाद हिये काया में बरतन माटी का, जो सूख पाया आदि भजन गाए।

हाथी पालकी पर होता है स्वागत
कार्यक्रम में बड़वाह के कलाकारों ने निमाड़ का पारंपरिक नृत्य गणगौर पेश किया। जिसके बोल रहे ढीला जी चल्या चकरी रे... थे। इसके बाद मालवा मंडली ने मटकी नृत्य पेश किया। वहीं, ढिंढौरी के कलाकारों गुदुमबाजा की प्रस्तुति दी। इसे शादी के समय दुल्हन के भाई को हाथी पालकी पर बैठाकर नचाया जाता है।