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अकाउंट, बिल, तनख्वाह, सरकारी सहायता, अर्जेंट सुनवाई, सर्वे, मजदूरों की सूची बन रही घर से

-कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम कार्यालय के कई बाबुओं की ड्यूटी कोरोना कंट्रोल रूम में, कुछ सर्वे में तो कुछ आ रहे कार्यालय,  

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भोपाल. लॉकडाउन की इमरजेंसी में कलेक्टोरेट में कलेक्टर, तीनों एडीएम का पूरा स्टाफ इमरजेंसी में कोरोना कंट्रोल रूम में शिफ्ट हो गया है। ये लोग लगातार कार्य कर रहे हैं और व्यवस्थाओं को लेकर जारी होने वाले आदेशों, अनुमतियों व अन्य कार्यों को देखते हैं। कलेक्टोरेट में तैतीस फीसदी कर्मचारी ही आ रहे हैं। बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। कलेक्टोरेट से ही जिले की पूरी कार्यवाई संचालित की जाती है, ऐसे में अकाउंट्स, अन्य प्रकार के बिलों के भुगतान, अर्जेट सुनवाई, किसानों या मजदूरों की सर्वे सूची, निर्वाचन के कार्य व अन्य काम सभी घर से संचालित हो रहे हैं।

ये हो तो और तेजी से हो काम
— कर्मचारियों ने बताया कि सर्वे सूची और अन्य प्रकार की मांगी गई जानकारी जिसे तत्काल शासन को भेजना होता है, इसके लिए इंटरनेट की सेवाएं काफी मजबूत होनी चाहिए। नेट कनेक्शन अच्छा होने से सर्वे और अन्य सूची तेजी से खुल सकेंगी और काम होने के बाद उन्हें आसानी से वापस भेजा जा सकता है। अभी इसमें समय लगता है।

— कलेक्टोरेट में इमरजेंसी ड्यूटी में कलेक्टर, एडीएम का स्टाफ स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम में शिफ्ट है। वहां से किराना चेन सप्लाई,
राशन, ट्रांसपोर्ट, मेडिकल, ड्यूटी चार्ट, सर्वे की जानकारी व अन्य जो आदेश दिए जा रहे हैं, वे सब जारी होते हैं। अधिकारी बताते हैं कि आदेश और अनुमतियां जारी करने का काम कार्यालय से ही संभव है।

ये काम किए जा सकते हैं शिफ्ट-

— अकाउंट्स के काम, कई प्रकार की मदों में किए जाने वाले बिलों, सरकारी सहायता, तनख्वाह बनाने का काम, निर्वाचन की
सूची कम्प्यूटर पर तैयार करवाना। बाढ़ आपदा या अन्य सर्वे के वे कार्य जो कम्प्यूटी पर हो सकते हैं घर से किए जा सकते हैं।

- शासन की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक मदद, मृत्यु, एक्सीडेंट, बीमारी में दी जाने वाली मदद की राशि को घर से शिफ्ट किया जा सकता है।
— 22 मार्च के बाद से कलेक्टोरेट के बिजली बिल में काफी कमी आई है। चार से पांच हिस्सों में अलग-अलग आने वाला बिल सिमटकर पचास से साठ हजार के बीच रह गया है। बैठकें और अधिकारियों के कक्ष के एसी बंद होने से बिन कम हो गया है। पहले से डेढ़ से पौने दो लाख के बीच आता था। अगर किसी महीने बैठकें ज्यादा होती हैं तो बिल सवा दो लाख तक पहुंचता है।

— इमरजेंसी सेवा में जुटे सभी सरकारी वाहन दौड़ रहे हैं, सिर्फ जो कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, उनके ही पेट्रोल
की बचत हो रही है। बाकी अधिकारियों और जो स्टाफ स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम जाता है उसकी खपत लगातार जारी है।

ऐसी है स्टाफ और बजट की स्थिति -
- विभाग में कलेक्टर, चार अपर कलेक्टर, 4 डिप्टी कलेक्टर (जो कलेक्टोरेट में रहते हैं ) के अलावा, खाद्य विभाग के 14 अफसर और सौ बाबुओं का स्टाफ है। इसमें से काफी ई-पास बनाने में लगा है।

- कलेक्टोरेट में कुछ कनिष्ठ अधिकारियों को छोड़कर लगभग सभी पद भरे हुए हैं।
— वर्क फार्म होम के ये फायदे हैं कि कर्मचारी को घर बैठे ही वे सारे काम करने की आजादी रहती है जो उसे कार्यालय आकर करने पड़ते हैं। जैसे फील्ड का अमला (आरआई, पटवारी ) जो सर्वे सूची तैरूार करता है उसे आसानी से घर से कम्पयालय किया जा सकता है।

- निर्वाचन के कार्य, यहां तक तक मतदाता सूची का अपडेशन भी घर से हो सकता है।
- खाद्य विभाग रोजाना के अपडेशन घर से करा सकता है,लेकिन जनता के लिए पात्रता पर्ची जैसे कार्यो के लिए कर्मचारी ऑफिस में ही बैठाना होगा।

वर्जन

शासन के आदेश के बाद तैतीस फीसदी कर्मचारियों को बुलाकर काम चल रहा है। आगामी दिनों में जैसा आदेश होगा उसी आधार पर काम कराया जाएगा।
तरुण पिथोड़े, कलेक्टर