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आडवाणी-जोशी के बाद अब इनका भी कट सकता है टिकट, उम्र फैक्‍टर के पीछे क्या है भाजपा की सियासत

आडवाणी-जोशी के बाद अब इनका भी कट सकता है टिकट, उम्र फैक्‍टर के पीछे क्या है भाजपा की सियासत

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भोपाल

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Pawan Tiwari

Mar 27, 2019

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आडवाणी-जोशी के बाद अब इनका भी कट सकता है टिकट, उम्र फैक्‍टर के पीछे क्या है भाजपा की सियासत

भोपाल.लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा की कद्दावर नेता सुमित्रा महाजन के टिकट को लेकर सस्पेंस बरकरार है। इस बार ताई को टिकट मिलेगा या नहीं अभी तक यह तय नहीं हुआ है। इस बीच इंदौर भाजपा ने एक प्रस्ताव पारित किया है कि पीएम मोदी इस बार वाराणसी के साथ-साथ इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ें। इस प्रस्ताव को केनद्रीय कमेटी के पास भेजा गया है। माना जा रहा है कि जो प्रस्ताव पास किया गया है उसके पीछे का खेल भी सुमित्रा महाजन का है। बता दें कि पार्टी आलाकमान इस बार वरिष्ठ नेताओं के टिकट काट कर नए चेहरों को मौका दे रहा है।

आडवाणी-जोशी के बाद अब ताई का भी कट सकता है टिकट
भाजपा ने इस बार पार्टी क संस्थापक सदस्य लालकृष्‍ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को भी लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया है। माना जा रहा है कि पार्टी लोकसभा स्‍पीकर सुमित्रा महाजन का भी टिकट काट सकती है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस बार सुमित्रा महाजन का टिकट भी 'एज फैक्‍टर' के कारण उलझ सकता है। सुमित्रा महाजन की उम्र अभी 76 साल है और वो 1989 से लगातार इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव जीत रही हैं। वो लगातार आठ बार संसद पहुंच चुकी हैं। लगातार आठ बार संसद पहुंचने वाली वो देश की पहली महिला सांसद हैं। 'एज फैक्‍टर' के कारण ही सुमित्रा महाजन का टिकट अभी भी होल्‍ड पर रखा है। भाजपा ने पहली सूची में इनका नाम शामिल नहीं किया है।

टिकट कटने के पीछे की क्या सियासत
लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के लौहपुरुष कहे जाते हैं। वो 2014 में गुजरात की गांधी नगर सीट से सांसद थे। आडवाणी यहीं से चुनाव लड़ते थे। इस बार उनकी जगह पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को टिकट दिया गया है। 75 वर्ष पार कर चुके नेताओं का टिकट काटने के लिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने पहल की थी। कहा जाता है कि उस फैसले को लेने से पहले कई बार बैठक भी ली गईं थी। कई बुजुर्ग नेताओं ने खुद चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। जिन सांसदों ने इंकार नहीं किया था उनका टिकट काट दिया है। इससे साथ ही पार्टी ने यह भी बताने की कोशिश की है कि भाजपा में किसी भी नेता का टिकट काटा जा सकता है। पार्टी से बड़ा कोई नहीं है। यह पार्टी अपने सिद्धातों पर चलने वाली पार्टी है।

ताई का गढ़ है इंदौर
इंदौर में कांग्रेस को तीन दशक से जीत नसीब नहीं हुई है। जबकि सुमित्रा महाजन यहां से आठ बार लगातार चुनाव जीत चुकी हैं। इंदौर में सुमित्रा महाजन को ताई के नाम से जाना जाता है। इंदौर सुमित्रा ताई का गढ़ है। वो यहां से लगातार आठ बार सांसद रही हैं। 1989 में प्रकाशचंद्र सेठी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। एनडीए सरकार में वे राज्यमंत्री भी रहीं। सुमित्रा महाजन ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत का रिकॉर्ड बनाया था। वे प्रदेश में सर्वाधिक 4 लाख 66 हजार 301 वोटों से चुनाव जीती थीं। महाजन को 8 लाख 54 हजार 372 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को 3 लाख 88 हजार 71 वोट थे। महाजन देश में सर्वाधिक वोटों से जीतने के क्रम में आठवें स्थान पर थीं। सुमित्रा महाजन देश की एक मात्र महिला हैं, जो लगातार आठवीं बार लोकसभा चुनाव जीती हैं। वहीं प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सात बार सांसद रह चुकी हैं।