
फोटो सोर्स: पत्रिका
MP News: एम्स भोपाल ने छाती में बिना चीरा लगाए और बिना ओपन हार्ट सर्जरी के दिल के छेद को बंद कर हृदय रोग उपचार में नई उपलब्धि हासिल की। डॉक्टरों ने बैलून फ्लेयरिंग तकनीक से पैर के नस के जरिए छेद को हाइब्रिड कवर स्टेंट से बंद किया गया। मध्यप्रदेश में यह तकनीक पहली बार अपनाई गई और मरीज की जान बचाने में मील का पत्थर साबित हुई। यह उत्तर भारत के गिने-चुने केंद्रों में उपलब्ध है।
मरीज के दिल में जो छेद था उसे साइनस वेनोसस एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (एएसडी) का कहा जाता है। यह छेद के दिल की ऊपरी दीवार पर दोनों चैंबर के बीच होता है और इसका उपचार डटिल होता है। इसी स्थान पर दाहिनी ऊपरी पल्मोनरी वेन (आरयूपीवी), जो फेफड़े में साफ खून पहुंचाती है।
आमतौर पर जटिल एएसडी मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी करनी पड़ती है। इसमें नसों की पोजिशन बदलने प्रक्रिया शामिल होती है और सफलता की संभावना 50 प्रतिशत रहती है। लेकिन एम्स की टीम ने 30 मिनट में बैलून फ्लेयरिंग तकनीक से हाइब्रिड कवर स्टेंट फिट कर सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक कर दी।
जानकारी के अनुसार 15 दिन पहले 18 वर्षीय युवक सांस फूलने और तेज धड़कन की समस्या लेकर एम्स पहुंचा था। हालत नाजुक होने से डॉक्टरों ने ओपन हार्ट सर्जरी को खारिज कर नई तकनीक का निर्णय लिया। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह और कार्डियो थोरेसिक विभाग की टीम ने 4 घंटे की ब्रेन स्टॉर्मिंग के बाद यह योजना बनाई। डॉ. शाह इस प्रक्रिया में एक अतिरिक्त दाहिनी ऊपरी पल्मोनरी वेन (आरयूपीवी) की सुरक्षा की और आरए-एसवीसी जंक्शन पर बैलून फ्लेयरिंग कर स्टेंट पूरी तरह फिट किया गया।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह ने कहा कि हाब्रिड कवर स्टेंट महत्वपूर्ण होता है। बैलून फ्लेरिंग तकनीक से स्टेंट को फलाकर पैर के नस के जरिए छिद्र को बंद किया जाता है। छिद्र को बंद रखने में हाइब्रिड कवर स्टेंट सबसे अधिक सुरक्षित होता है। दाहिनी ऊपरी पल्मोनरी वेन (आरयूपीवी) की सुरक्षित रही। ठीक होने पर मरीज को छुट्टी दे दी गई।
Published on:
21 Sept 2025 02:22 pm

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