22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

तेजी से बढ़ रहा है एयर पॉल्यूशन, फिर भी बंद पड़े हैं 80% PUC सेंटर

वाहनों से बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर कहीं कोई सख्ती नहीं दिखती। 80 फीसदी पेट्रोल पंपों पर पीयूसी सेंटर बंद पड़े हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भोपाल

•

image

Mohammad Faiz Mubarak

•

Updated: 15 Nov 2022, 10:01 AM IST

News

तेजी से बढ़ रहा है एयर पॉल्यूशन, फिर भी बंद पड़े हैं 80% PUC सेंटर

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रदूषण की एक बड़ी वजह गाड़ियों से निकलने वाला धुआं भी है। लेकिन, वाहन प्रदूषण को लेकर कोई कहीं कोई सख्ती नहीं दिखती। 80 फीसदी पेट्रोल पंपों पर पीयूसी सेंटर बंद पड़े हैं। शहर के करीब 140 पीयूसीसेंटर दिनभर में 20 वाहनों की भी जांच नहीं करते। यही कारण है कि सड़कों पर वाहन धुआं छोड़ते हुए सम्पट दौड़ रहे हैं। दूसरे पीएम 2.5 अनियमित निर्माण कार्य और सड़कों से उड़ने वाले धूल से भी हो रहा है। लेकिन, इस ओर शहर सर कार कोई ध्यान नहीं दे रही है।

स्क्रैप पॉलिसी भी ढीली पड़ी राजधानी में पुराने वाहनों के लिए स्क्रैप पॉलिसी लागू है। लेकिन, अभी तक कोई सेंटर ठीक से काम नहीं कर रहा। दर्जनों अनफिट और कबाड़ा बसें आज भी सड़कों पर धुएं का गुबार उड़ाते हुए बेफिक्री से दौड़ रही हैं।

यह भी पढ़ें- अब जेल में पुलिस अफसरों के साथ क्रिकेट खेलेंगे कैदी, तैयारियां जोरों पर


PUC सेंटर वालों के लाख बहाने

टीटी नगर स्थित एचपी पेट्रोल पंप पर बने पीयूसी सेंटर पर पिछले कई महीनों से ताला लटका हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि, कोई आता ही नहीं तो बंद कर दिया। प्रभात पेट्रोल पंप से तो पीयूसी सेंटर ही हटा दिया गया। होशांगाबाद रोड पर बने पेट्रोल पंप पर पीयूसी सेंटर बंद होने का कारण पूछने पर जवाब मिला, सेंटर चलाने वाला लड़का अभी बाहर गया है। बीयू के सामने खड़ी पॉल्यूशन चेकिंग वैन भी महज शोपीस बनकर रह गई है।

यह भी पढ़ें- बैटरी वेस्ट मेनेजमेंट पॉलिसी लागू, पर्यावरण के लिए खतरा नहीं बनेगा बैटरी का कचरा


क्या कहते हैं एक्सपर्ट ?

इस संबंध में मौसम एक्सपर्ट अजय शुक्ला का कहना है कि, डीजल का धुंआ गैसों और कई तरह के सूक्ष्म कणों से भग होता है। अगर वाहन की सही समय पर सर्विस नहीं होती है तो उससे खतरनाक गैसों का उत्सर्जन होता है। इससे हवा में अच्जले कणों का फैल जाते हैं। ये फेफड़ों में गहणई तक समा जाते हैं।

तीन बहनों के इकलौते मासूम भाई को कार ने रौंदा, देखें वीडियो