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मुगल काल में बने थे राम दरबार के सिक्के, बादशाह अकबर ने किया था जारी

भगवान राम और सीता के मुद्रित सिक्के लंदन के म्यूजियम और महीदपुर में मौजूद

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भोपाल. आयोध्या में रामलला के मंदिर के निर्माण का शिलान्यास होने जा रहा है। इस कार्यक्रम को लेकर राजनैतिक दलों से लेकर आम जन तक में उत्साह देखा जा रहा है। पूरे देश में दीवाली जैसा माहौल बन गया है। आज आपको बताते हैं कि मुगलकाल में भी भगवान राम की पूजा की जाती थी। बादशाह अकबर ने भगवान राम और सीता मुद्रित ये सिक्के बनवाए थे यह सिक्के सोने चांदी से बने थे, जो उस समय की मुद्रा हुआ करती थी।

मुगलकालीन है सिक्के

बुरहानपुर के सिक्का संग्राहक मेजर डॉक्टर महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि अकबर ने यह सिक्के बनवाए थे क्योंकि उनकी पत्नी हिंदू थी उन्हीं की आस्था को देखते हुए यह सिक्के बने थे जो अभी एक सिक्का लंदन के म्यूजियम में रखा हुआ है। अकबर ने राम के आदर्शों को जन- जन तक पहुंचाने को जारी किए थे। वर्तमान में जो प्राचीन सिक्के सामने आ रहे हैं जिस पर भगवान राम और सीता की तस्वीर है। यह सिक्के 50 से 200 साल पुराने है यह मुद्राएं नहीं थी केवल बरकत के लिए बनाई गई थी।

महिदपुर में हैं 40 दुर्लभ सिक्के
बताया जाता है कि उज्जैन का अयोध्या से गहरा संबंध है। सैकड़ों साल पहले जब मालवा से लोग अयोध्या जाते थे तो बापसी में राम दरबार के सिक्के लेकर ही लौटते थे। इस तरह के 40 सिक्के महिदपुर में आज भी देखने को मिल जाएंगे। सिक्कों के संग्राहण अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर में है।अश्विनी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. आरसी ठाकुर की माने तो उनको ये सिक्के पिता से मिले थे। ये सिक्के 16वीं शताब्दी के बताये जाते हैं। डॉ. आरसी ठाकुर के पिता मुद्राशास्त्री पर्वत सिंह ठाकुर भी सिक्कों का संग्रहण थे। उन्होंने चांदी और पीतल के 40 से अधिक सिक्के को संभाल कर रखा था। इन सिक्कों पर संवत् 1740 अंकित है। सिक्कों के एक तरफ राम दरबार है, तो दूसरी तरफ रामराज्य।

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