14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MP के हर विकासखंड में एक बाल शिक्षा केंद्र, यहां प्ले स्कूल की तरह होगी पढ़ाई

पहले चरण में 313 आंगनबाड़ी केंद्रों में खोले बाल शिक्षा केंद्र

2 min read
Google source verification
Anganwadi centers will develop like play schools

बाल शिक्षा केंद्र

भोपाल. प्रदेश के हर विकासखंड के एक आंगनबाड़ी केंद्र को बाल शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी यहां प्ले स्कूल की तरह पढ़ाई होगी। पहले चरण में प्रदेश के 313 आंगनबाड़ी केंद्रों में बाल शिक्षा केन्द्र शुरू किए गए हैं। इन केंद्रों में छह साल तक के बच्चों को प्री-प्रायमरी शिक्षा की तैयारी कराई जा रही है। आंगनबाडिय़ों में आने वाले तीन से छह साल तक के बच्चों के लिए 19 विषयों का माहवार पाठ्यक्रम तय किया गया है। इसमें उनकी स्वयं की पहचान, मेरा घर, व्यक्तिगत साफ-सफाई, रंग और आकृति, तापमान व पर्यावरण, पशु-पक्षी, यातायात के साधन, सुरक्षा के नियम, बच्चों का आत्म-विश्वास और हमारे त्यौहार शामिल हैं। बाल शिक्षा केंद्र में बच्चों के लिए आयु समूह के अनुसार तीन एक्टिविटी वर्कबुक भी तैयार की गई हैं।

शिशु कार्ड भी बनाए
वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सालभर की गतिविधियों के संकलन का मासिक और साप्ताहिक कैलेंडर दिया गया है। इसमें बच्चों का विकास जानने लिए आयु समूह के अनुसार शिशु विकास कार्ड बनाए गए हैं। साथ ही आंगनबाड़ी छोड़ते समय बच्चों को प्रमाण-पत्र और हर साल पीएसई किट उपलब्ध कराई जा रही है।

खेल-खेल में होगी पढ़ाई
शिक्षा केंद्रों में खेल-खेल में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए दैनिक गतिविधियां तय की गई हैं। इसमें खेल, नाटक, नकल करने वाले खेल, सामूहिक और नियमबद्ध खेल शामिल हैं।

पढ़ाई के लिए समय
बाल शिक्षा केंद्रों पर हर दिन 3 से 4 घंटे का समय शाला-पूर्व शिक्षा के लिए निर्धारित है। बच्चों को एक गतिविधि के लिए 15 से 20 मिनिट का समय निर्धारित किया गया है, क्योंकि 3 से 6 वर्ष तक की उम्र के बच्चे एक गतिविधि पर इससे अधिक समय तक ध्यान नहीं दे पाते।

कक्ष की आकर्षक साज-सज्जा
बच्चों को आकर्षित करने के लिए शिक्षा केंद्रों में रंग बिरंगी साज-सज्जा की गई है। कक्ष में दीवारों पर चार्ट, पोस्टर्स और कटआऊट लगाए गए हैं। बड़े समूह की गतिविधियों के लिए कक्ष के एक कोने में मंच की व्यवस्था की है, जहां बच्चे पुस्तक पढ़कर सुनाते हैं, गाना गाते हैं, कविताएं और कहानियां सुनाते हैं।