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बड़वाले महादेव मंदिर का होगा कायाकल्प, पुराने मंदिर को तोडकऱ शीघ्र शुरू होगा नवनिर्माण

- धौलपुर के पत्थरों से बनेगा बड़वाले महादेव का गर्भगृह, 31 फीट होगा शिखर-पुराने निर्माण की तुड़ाई शुरू, लगभग एक पखवाड़े बाद शुरू होगा नवनिर्माण, एक साल में बनकर होगा तैयार ऐस रहेगा मंदिर का स्वरूप- 31 फिट ऊंचा होगा वटेश्वर का शिखर- 21 फिट ऊंचा होगा हनुमान मंदिर- 11 फिट के होंगे नंदी महाराज- 2 करोड़ से अधिक की लागत से होगा तैयार

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बड़वाले महादेव मंदिर का होगा कायाकल्प, पुराने मंदिर को तोडकऱ शीघ्र शुरू होगा नवनिर्माण

बड़वाले महादेव मंदिर का होगा कायाकल्प, पुराने मंदिर को तोडकऱ शीघ्र शुरू होगा नवनिर्माण

भोपाल
शहर का प्राचीन शिवालयों में शुमार बड़वाले महादेव मंदिर आने वाले दिनों में नए स्वरूप में नजर आएगा। इस मंदिर का नवीनीकरण किया जा रहा है। मंदिर के पुराने निर्माण की तुड़ाई का काम अंतिम चरणों में चल रहा है। मंदिर का गर्भगृह जहां है वहीं रहेगा। इसके ऊपर फिलहाल चादरे डाल दी गई है। पुराने निर्माण की तुड़ाई के बाद नवरात्र में इसका नवनिर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।



बड़वाले महादेव मंदिर शहर का प्राचीन मंदिर है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, साथ ही साल में होने वाले कई उत्सवों का आयोजन यहां काफी धूमधाम से और परम्परागत रूप से किया जाता है। मंदिर समिति के संजय अग्रवाल और प्रमोद नेमा ने बताया कि मंदिर अति प्राचीन होने के कारण उत्सवों में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यवस्थापकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए मंदिर का नवनिर्माण किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालु उत्सवों में भाग ले सके और किसी तरह की दिक्कते न हो।

धौलपुर के पत्थरों से बनेगा गर्भगृह
इस मंदिर का नवनिर्माण तकरीबन एक साल में दो करोड़ से अधिक की लागत से यह बनकर तैयार होगा। मंदिर समिति के प्रकाश मालवीय ने बताया कि मंदिर के नवीनीकरण के लिए भूमिपूजन कार्यक्रम पहले ही हो चुका है। इस मंदिर के गर्भगृह का पूरा कार्य धौलपुर के पत्थरों से किया जाएगा। इसी प्रकार मंदिर में स्थित हनुमानजी के मंदिर का भी निर्माण बड़े स्वरूप में होगा। यहां वटेश्वर का शिखर 31 फिट का रहेगा, जबकि हनुमानजी का शिखर 21 फिट और नंदी महाराज का शिखर 11 फिट का होगा। मंदिर में पर्याप्त पेयजल और हाथ धोने की व्यवस्था की जाएगी। इसका डिजाइन आर्किटेक्ट मिलिंद जुमल़े द्वारा तैयार किया जा रहा है।

बड़ के पेड़ की जड़ में विराजमान है स्वयंभू शिवलिंग, 200 साल पुराना है इतिहास

बड़वाले महादेव मंदिर शहर के प्राचीन मंदिरों में शुमार है। इस मंदिर में अनेक श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी हुई है। इस मंदिर का इतिहास 200 साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है। यहां बड़ के पेड़ की जड़ में स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। इस बड़ की खासियत यह है कि आमतौर पर बड़ के पेड़ की जटाए नीचे लटकती है, लेकिन इस बड़ की जटाए नहीं है। इसलिए इस मंदिर को बड़वाले महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार पिछले 200 सालों तक जो इतिहास बुजुर्गों से प्राप्त हुआ है, उसके अनुसार यहां तकरीबन 200 साल पहले एक बगीचा हुआ करता था, जिसमें अनेक प्रजातियों के वृक्ष थे। एक दिन एक यात्री महात्मा विश्राम करने बगीचे में आए और वटवृक्ष की छाया में थकान मिटाने लेट गए। करवट लेने के दौरान उनका सर वृक्ष की जड़ में स्थित शिला से ठकराया। जब उन्होंने गोल शिला को देखा तो उन्हें शिवलिंग के दर्शन हुए। इसके बाद महात्मा ने आसपास की खुदाई कराई, लेकिन 36 फीट खुदाई के बाद भी उसका छोर नहीं मिला, इसके बाद पेड़ की जड़ में पानी आ जाने के कारण खुदाई रोक दी गई। तब से यहां पूजा अर्चना शुरू कर दी जो आज भी निरंतर जारी है। इस मंदिर परिसर में एक कुंआ भी है। मंदिर से जुड़े पदाधिकारियों का दावा है कि यहां कुएं के पानी से अनेक चर्मरोगी ठीक हुए है। इस कुएं की एक खासियत यह भी है कि कुएं जल स्तर भीषण गर्मी में भी खत्म नहीं होता है।

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