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अब राज्यपाल के सामने रखा भ्रष्टाचार-साठगांठ का पुलिंदा

भोज विवि: डायरेक्टर की प्रताडऩा का मामला

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भोपाल. मप्र भोज मुक्त विवि में स्पेशल बीएड विभाग की प्रभारी डायरेक्टर वर्षा सागोरकर से पीडि़त और विवि में प्रताडऩा की शिकार अतिथि विद्वान और व्याख्याताओं ने राजभवन से लेकर मानवाधिकार आयोग तक गुहार लगाई है। इस बार पीडि़तों ने मानवाधिकार आयोग को कड़ी कार्रवाई नहीं करने पर भी कठघरे में खड़ा किया है, वहीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के सामने भ्रष्टाचार और साठगांठ का पुलिंदा खोलकर रख दिया है। इस मामले में संबंधित के विरुद्ध जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। विश्वविद्यालय में अतिथि विद्वान रहीं नीतिका तिवारी, अतिथि व्याख्याता रहीं मणिकेश्वरी श्रीपादा ने राजभवन में की गई शिकायत में आरोप लगाया कि पूर्व में की गई शिकायतों के आधार पर विवि ने जो जांच कराई उसमें सिर्फ लीपापोती की गई। अभी भी विवि में भ्रष्टाचार करने वाले काम कर रहे हैं। आवेदकों ने मांग है कि रिंकी शिवहरे, याचना सक्सेना, हेमलता दिनकर और वर्षा सागोरकर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रभारी डायरेक्टर वर्षा सागोरकर के विरुद्ध पीडि़तों ने मानसिक रूप से प्रताडि़त करने, लांछन लगाने और अर्मायादित व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही राजभवन से अंतरिम आर्थिक राहत दिलाने की भी मांग की।

न्याय नहीं दिला सकता तो आयोग किस काम का

मानवाधिकार आयोग में की गई शिकायत के पूरे 41 दिन निकल जाने के बाद भी किसी तरह की राहत नहीं मिलने से नाराज इन पीडि़तों ने आयोग से भी नाराजगी जाहिर की। पीडि़ता नीतिका तिवारी ने आयोग में की गई शिकायत में बताया कि उसने पहला आवेदन 13 अगस्त को दिया था, लेकिन आज तक आयोग की तरफ से उन्हें कोई भी उचित न्याय नही मिला। इस पर आयोग का अधिक सहायता करने में असमर्थता जताना भी घोर निराशाजनक है। तिवारी ने कहा कि यदि आयोग न्याय नही दिला सकता तो ऐसे आयोग का क्या मतलब। पीडि़ता ने आयोग से एक टीम गठित कर जांच कराने व आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।

चोरी के आरोप में निकाले गए कर्मचारी को वापस लाने की तैयारी
विवि सूत्रों के अनुसार प्रैक्टिकल फाइल चोरी करने के मामले में विवि से निकाले गए कर्मचारी विकास यादव को एक बार फिर से यहां लाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए एक नोटशीट भी चलाई गई है। सुरक्षा एजेंसी द्वारा डीएमई विभाग में कार्यरत विकास यादव को 05 मई 2018 को विवि से निष्कासित किया गया था।