एक फूल में पूरी महाभारत, जानिए क्या है “कृष्ण कमल”

कृष्ण कमल की बनावट ही उसकी पूरी कहानी बयान कर देती है। कृष्ण कमल की मान्यता है कि इसमें महाभारत काल के सम्पूर्ण महत्वपूर्ण पात्र समाहित हैं....

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Sep 05, 2015
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श्रीबाबु गुप्ता

भोपाल।
आज कृष्ण कन्हैया का जन्मदिवस बड़ी ही धूमधाम के साथ पूरे देश में मनाया जा रहा है। सभी जगह 'गोविंदा आला रे' की धूम है। बड़े ही उत्साह के साथ दही-हांडी प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं। बच्चों और बड़ों में होड़ है दही हांडी फोड़ने की।



इससे पूर्व इस दिन प्रातःकाल से ही सूर्योदय के साथ ही मंदिरों के पट खोलकर नन्दलाला का श्रृंगार प्रारंभ कर पूजा-पाठ शुरू की जाएग। सभी मंदिरों और घरों में कान्हा को माखन मिश्री का भोग लगाया जाएगा। छप्पन भोग बनाए जा रहे हैं। उत्साह के साथ चारों और 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के जयकारे सुनाई देंगे।

कृष्ण को प्रिय भी 'कृष्ण कमल'
यदि इस दिन कृष्ण कमल की बात न की जाए तो व्यर्थ ही होगा, क्योंकि यह भगवान श्री कृष्ण को अतिप्रिय भी है और उन्हें चढा़ए जाने की मान्यता भी है।

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कृष्ण कमल की मान्यताएं
कृष्ण कमल की बनावट ही उसकी पूरी कहानी बयान कर देती है। यह भगवान कृष्ण को अतिप्रिय है। कृष्ण कमल की मान्यता है कि इसमें महाभारत काल के सम्पूर्ण महत्वपूर्ण पात्र समाहित हैं। जैंसे- कौरव, पांडव, ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं साक्षात भगवान कृष्ण भी। यह पुष्प तीन वर्षों में एक ही बार पुरुषोत्तम मास में खिलता है।

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कृष्ण कमल में समाहित है महाभारत

क्या आप जानते हैं कि किस प्रकार से मात्र एक कृष्ण कमल में पूरा महाभारत समाहित है। आप पुष्प की बनावट को देखें, उसके आसपास की बैंगनी पत्तियों की संख्या पूरी 100 हैं, जो कौरवों की हैं। इसके बाद उसके ऊपर जो पांच हरे बड़ हैं वे 5 पांडव के प्रतीक हैं। इसके बाद जो तीन छोटे-छोटे बड़ हैं, वे ब्रह्मा-विष्णु-महेश के प्रतीक हैं और जो केंद्र में विराजमान हैं, वे साक्षात भगवान सुदर्शन कृष्ण स्वरूप हैं।

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शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि कृष्ण भगवान को पीले फूलों वाली कटसरैया के फूल चढ़ाने से असली सोने के फूल चढ़ाने का पुण्य मिलता है। भगवान के गले में वैजयंती माला है, जो कमल के बीजों से ही बनी है। कमल के बीजों से यह माला इसलिए बनी होती है, क्योंकि कमल के बीज काफी सख्त होते हैं, न तो वे टूटते हैं और न ही सड़ते हैं। इन कमल के बीजों की चमक सदा बनी रहती है, जो मनुष्य के जीवन को प्रेरणा देते हैं कि समय चाहे कैंसा भी हो सदैव सुखी रहें, मुस्कुराते रहें।

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क्यों पसंद है कान्हा को माखन का भोग

माखन-मिश्री का मेल जीवन में प्रेम का प्रतीक होता है। जिस प्रकार माखन के प्रत्येक हिस्से में मिश्री की मिठास समा जाती है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में प्रेम समाहित होता है। मिश्री युक्त माखन जीवन और व्यवहार में प्रेम को अपनाने का संदेश देता है। यह बताता है कि प्रेम में किसी प्रकार से घुल-मिल जाना चाहिए।

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कमल की महिमा

पुरातन काल से ही योग और अध्‍यात्‍म में कमल के फूल को एक प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है। साधू-संतों ने भी बताया है कि यदि कमल के गुणों को अपने जीवन में उतार लें तो उसी की भांति इस दुनिया में खिल सकते हैं। शरीर के सात मूल चक्रों के लिए कमल के सात तरह के फूलों को प्रतीक चिह्न माना गया है।

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जिस प्रकार से जहां कहीं कीचड़ और दलदल बहुत गाढ़ा होता है या जहां कहीं पानी गंदा हो और मल-कीचड़ से भरा हो, कमल का बीज वहीं सबसे बेहतर पनपता है। मनुष्य के जीवन में भी कुछ ऐसे ही उतार-चढ़ाव आते हैं। मनुष्य दुनिया में जहां कहीं भी जाता है उसे गंदगी, बुराई, मैली और निंदा नामक बुराई अवश्य मिलती है। चाहे मनुष्य अपने मन में ही क्यों न झांककर देखे, वहां भी उसे यही गंदगी दिखाई देगी, लेकिन जो मनुष्य इस गंदगी के बावजूद वहां कमल नामक पुष्प उगा लेता है तो वो उस गंदगी में भी सुख का अनुभव करता है और सफलता का वरण करता है।
Published on:
05 Sept 2015 01:47 pm
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