
भोपाल। राजधानी में प्रतिदिन नगर निगम साढ़े चार लाख घरों में पानी पहुंचाता है। लेकिन इन घरों में रहने वाले कुछ परिवार ऐसे हैं जो उधार का पानी पी रहे हैं और सरकार को करोड़ों की चपत लगा चुके हैं। दरअसल इन घरों में रहने वाले करीब दो लाख लोग ही पानी का बिल चुकाते हैं। जबकि हर साल ऐसे ढाई लाख लोग हैं, जो पानी लेने के बाद पैसा नहीं देते हैं। इससे बीते चार वर्ष में नगर निगम को 50 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। लेकिन लोगों की इस मूलभूत सुविधा को होना अतिआवश्यक होने के कारण निगम इनके कनेक्शन नहीं काटता। अब निगम को शिकायत है कि लोग निगम की इसी बात का फायदा उठा रहे हैं कि उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा पा रही।
आपको बता दें कि साढ़े चार लाख कनेक्शन में निजी व व्यावासायिक कनेक्शन शामिल हैं। इनमें से डेढ़ लाख कनेक्शन झुग्गी बस्तियों के रहवासियों को दिए गए हैं। हालांकि निगम द्वारा इसके अलावा सार्वजनिक बोरिंग और टैंकरों से भी पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन इसका पैसा नहीं वसूला जाता है। ऐसे में नगर निगम को हर वर्ष करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। इसकी भरपाई करने के लिए नगर निगम जल आपूर्ति में होने वाले खर्च में कटौती करने जा रहा है। इसके लिए जल शोधन केंद्र और पंप हाउस में बिजली की खपत कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। बता दें कि नगर निगम पानी आपूर्ति के लिए सामान्य घरों से 210 रुपए और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों से 30 रुपए प्रतिमाह जल उपभोक्ता प्रभार वसूलता है।
वसूली से ज्यादा आता है बिजली का खर्च
नगर निगम के जिम्मेदारों के मुताबिक औसतन हर साल 20 से 25 करोड़ रुपए जल उपभोक्ता प्रभार की वसूली की जाती है। लेकिन इससे ज्यादा खर्च तो निगम को बिजली और अन्य जरूरी संसाधनों पर करना पड़ता है। अकेले बिजली खपत को देखा जाए, तो जलापूर्ति का खर्च ही हर साल 20 करोड़ रुपए से अधिक है।
पुराने शहर में नहीं हो पाती वसूली
पुराने शहर में जल उपभोक्ता प्रभार की वसूली करने में सबसे ज्यादा स्थिति खराब है। यहां करीब ढाई लाख कनेक्शन हैं। लेकिन इनमें से डेढ़ लाख लोग पानी का बिल नहीं चुकाते हैं। हालांकि नगर निगम ने पिछले वर्ष कुछ कालोनियों में कनेक्शन काटे थे। लेकिन जनप्रतिनिधियों के दबाव के कारण जलापूर्ति सामान्य कर दी जाती है।
अब तक की गई वसूली
नगर निगम के मुताबिक वर्ष 2018-19 में लोगों से 41 करोड़ रुपए की वसूली करनी थी लेकिन वूसल कर पाए केवल 37 करोड़ रुपए। वहीं 2019-20 में 32 करोड़ रुपए वसूले जाने थे, लेकिन 27 करोड़ रुपए की वसूली ही की गई। 2020-21 में 38 करोड़ रुपए के बजाय 21 करोड़ रुपए की वसूली की जा सकी। 2021-22 में 40 करोड़ रुपए वसूले जाने थे, लेकिन वसूले केवल 18 करोड़ रुपए ही गए।
Updated on:
15 Oct 2022 04:27 pm
Published on:
15 Oct 2022 04:26 pm

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