
हिमाचल प्रदेश के दल ने रेणुका माता पूजा का प्रदर्शन नृत्य के द्वारा किया था। इस दल को 31 हजार का पुरस्कार दिया गया। वहीं त्रिपुरा के बच्चों ने होजगिरी नृत्य पेश कर थर्ड प्राइज जीता।उन्हें 21 हजार का पुरस्कार दिया गया। इस तरह झारखंड के दल ने नागपुरी लोकनृत्य की और सिक्कीम की टीम ने पारंपरिक नृत्य नेपाल देउसी भैली की प्रस्तुति देकर सांत्वना पुरस्कार जीते। अंतिम दिन सीबीएसई स्कूलों के बच्चों ने लोक नृत्य की प्रस्तुति दी।

लड़कों ने निभाई लड़कियों की भूमिकाहिमाचल प्रदेश की टीम के प्रशिक्षक मनीष टंडन ने बताया कि सिरमोटी हिमाचल का एक इंटीरियर एरिया है। यहां के रहने वाले लोग किसी भी फेस्टिवल, शादी या खुशी के मौके पर सिरमोटी नृत्य के द्वारा देवी देवताओं की पूजा करते हैं। हिमाचल से हर साल बालरंग में लड़के और लड़कियों को बारीबारी से भेजा जाता है। इस साल लड़कों का टर्न था और हमने लड़कियों की भूमिका लड़कों से कराई।

पारंपरिक नृत्य नेपाल देउसी भैली की प्रस्तुति

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