
मास्टर प्लान के पुराने नक्शों में चौड़ी सड़कें, नए में हो गईं छोटीं, जनता हो रही गुमराह, तेजी से बढ़ रहा स्लम, बड़ा तालाब का क्षेत्र संवेउनशील से हो गया सामान्य
भोपाल. शहर विकास का ड्राफ्ट मास्टर प्लान पिछले 16 साल से अटका पड़ा है। कांग्रेस सरकार ने 6 मार्च 2020 में इसका ड्राफ्ट जारी किया, 1731 दावे आपत्ति आईं। जो शासन के पास भेजी जा चुकी हैं। आप को जानकार थोड़ी हैरानी हो सकती है कि वर्ष 2005 के मास्टर प्लान में विवादित सड़कें 30 मीटर चौड़ी थीं, वह नए नक्शों में 12 से 15 मीटर ही रह गईं। कई सड़कें नक्शों से गायब ही हो गईं। लेकिन बिल्डर प्रोजेक्ट बेचते समय अपने ब्रोशर में मास्टर प्लान के पुराने नक्शों का उपयोग ही कर रहे हैं। जिसमें खुली सड़कें दिखाई देती हैं। इससे जनता गुमराह होती है क्योंकि मौके पर उसमें अतिक्रमण हो गया है। पार्र्किंग की जगह पर अवैध कब्जे हैं। मंगलवार को भोपाल विकास के मुद्दे को लेकर जिला पंचायत कार्यालय में हुई बैठक में ये बात शहर के जनप्रतिनिधियों ने उठाई। उनका कहना था कि टीएंडसीपी के अधिकारी बिल्डर को अनुमति देते समय नक्शों का ध्यान रखें या फिर जो सड़कें अटकी हैं, उनको पूरी तरह से विस्तार करें। वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के बाद आज 2021 की स्थिति में राजधानी में जमीन आसमान का अंतर हो गया है। जो सड़क 30 मीटर की हुआ करती थी उस पर आज 18 मीटर का कब्जा हो गया है। उदाहरण के लिए आसाराम से अचारपुरा की चार किमी सड़क। ऐसे में इस सड़क पर कागजों में ही पार्किंग प्रस्तावित कर दी तो वो बनेगी कहां? कब तक अवैध कब्जे हटेंगे? बड़ा तालाब के हिस्से को ही वर्ष 2005 के नक्शे में संवेदनशील बताया गया, लेकिन वर्ष 2021 के मास्टर प्लान के लिए बुलाई दावे आपत्ति के लिए कलेक्टोरेट में चस्पा किए नक्शों में कुछ नहीं लिखा, सब सपाट है।
आंकड़ों के अनुसार राजधानी में 1,02,803 झुग्गी-झोपड़ी हैं। जिनमें 4,79,699 लोग रहते हैं। इनको बसाने में झुग्गी माफिया का बड़ा हाथ है। शहरी क्षेत्र के अलावा वन क्षेत्र, राजस्व भूमि पर इनके अवैध कब्जे हो गए हैं। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। इनको कम करने के लिए मास्टर प्लान में प्रावधान लाना होगा। वर्ना शहर धीरे-धीरे स्लम की तरफ बढ़ता चला जाएगा। भोपाल विकास योजना 2005 का नियोजन क्षेत्र 601 वर्ग किलोमीटर और भोपाल विकास योजना 2031 के लिए प्रस्तावित योजना क्षेत्र 1,016.9 वर्ग किलोमीटर है। ऐसे में कई स्थानों की जमीनों का लैंडयूज भी बदला जाएगा।
मास्टर प्लान की 26 सड़कें नहीं बन पाईं
मास्टर प्लान में तय की गई करीब 26 सड़कें आज तक नहीं बन सकीं। अतिक्रमण और भू-अर्जन की वजह से ये अटकी हुई हैं। बरखेड़ से अवधपुरी को जोडऩे वाली एक सड़क पर एक स्कूल बाधा बना हुआ है। मास्टर प्लान में बावडिय़ा कला रेल क्रॉसिंग का आरओबी बन गया है. इसके अलावा अभी एक और आरओबी प्रस्तावित है। मिसरोद फेज-2 तक की तीन सड़कें नहीं बनी। सिंगारचोरी रेलवे क्रॉसिंग से बैरसिया रोड 4.47 किलोमीटर तक की सड़क पर अवैध कॉलोनियां कट चुकी हैं। औरा मॉल से शाहपुरा सी-सेक्टर की 1.56 किमी. तक की सड़क पर प्लॉटिंग हो गई। नादरा से बैरसिया की तरफ जाने वाली सड़क अतिक्रमण से सिकुड़ गई। वर्जन
अगर 2021 के ड्राफ्ट को लेकर जनहित याचिका दायर कर रखी है। ग्रीन बेल्ट को कमर्शियल कर दिया है। आज कल सैटेलाइट से सर्वे किए जाते हैं। पता नहीं ये लोग कैसे और क्या करते हैं
अरुण गुर्टू, रिटायर्ड डीजीपी, यचिकाकत
Published on:
14 Jul 2021 08:50 pm

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