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भोपाल . चेतक ब्रिज सिक्स लेन बनने के बाद यहां से गुजरने वाले वाहन आसपास के मकानों के छज्जों से छूकर निकलेंगे। ब्रिज को 7.5 मीटर चौड़ा करने के लिए तैयार डिजाइन में अब कई खामियां सामने आने लगी हैं। 1975 में बनकर तैयार 12.8 मीटर चौड़ाई वाले चेतक ब्रिज को 20.3 मीटर तक चौड़ा करने की कार्रवाई जनवरी 2016 से चल रही है। ब्रिज को दोनों तरफ 3.75 मीटर तक बढ़ाया जा रहा है जिसके लिए रिटेनिंग वॉल, आरसीसी कॉलम और लोहे के गर्डर का सहारा लिया जाएगा।
रिटेनिंग वॉल और दो मीटर तक चौड़े आरसीसी कॉलम कस्तूरबा नगर, एमपी नगर सहित रचना नगर के हिस्से में आने वाले निर्माणों के बेहद करीब से गुजरेंगे। कई जगह ये दूरी मात्र तीन से पांच फीट रह जाएगी। इंडियन रोड सेफ्टी मानकों के अनुसार सिक्स लेन ब्रिज स्ट्रक्चर का आवासीय और व्यवसायिक निर्माणों के इतना करीब होना सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही कारणों से घातक है। मैनिट के एक्सपर्ट के इन तर्कों से लोक निर्माण विभाग ने पल्ला झाड़ लिया है। अफसरों का कहना है कि पहले मकान, दुकान तोडऩे की योजना थी लेकिन राजनीतिक दबाव में इसे प्लानिंग से हटा दिया गया। कंस्ट्रक्शन कंपनी पुनीत चढ्ढा दिसंबर 2017 तक प्रोजेक्ट पूरा करेगी।
प्रतिवर्ष 10 प्रतिवर्ष बढ़ेगा पीसीयू
चेतक पर अभी 7 से 8 हजार पैसेंजर कार यूनिट ट्रैफिक लोड आंका गया है। एक अनुमान के मुताबिक ये प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत तक बढ़ेगा। ब्रिज के आसपास की जमीनें बीडीए ने लीज पर बांटी हैं जिन पर कंस्ट्रक्शन 1989 में हुए थे। वाहनों के गुजरने से पैदा होने वाला कंपन इन निर्माणों की सेहत खराब करेगा जबकि ध्वनि एवं वायू प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालेगा।
तोडफ़ोड़ का हुआ था विरोध
लीज पर बंटी जमीनों पर बने निर्माणों को हटाने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने योजना बनाई थी। साल 2015 में इस योजना का खासा विरोध हुआ था जिसके बाद मामले में राजनीतिक दखल शुरू हो गया। साल अंत तक नई प्लानिंग तैयार हुई और चेतक के बगल से गुजरने वाली सर्विस रोड के किसी भी निर्माण को नहीं तोडऩे का फैसला हुआ।
एक नजर चेतक ब्रिज पर
-646 मीटर कुल लंबाई
-12.8 मीटर फिलहाल चौड़ाई
-20.3 मीटर रेनोवेशन के बाद चौड़ाई-
-7.5 मीटर ब्रिज की चौड़ाई में वृद्धि
-24 मीटर चौड़ाई चौराहों पर
-2 से 3 फीट रचना नगर तरफ डिस्टेंस
-5 फीट कस्तूरबा नगर की तरफ
-3 से 4 फीट एमपी नगर जोन वन की तरफ
-3 फीट से भी कम जोन टू की तरफ नजदीक
सिक्स लेन आरओबी का पुराने कंस्ट्रक्शन्स के इतने करीब से गुजरना खतरनाक है। कई महानगरों में एेसा निर्माण हुआ था जिसके परिणाम हादसों के रूप में मिले। लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पडऩा तय है।
-सिद्धार्थ रोकड़े, एक्सपर्ट, रोड सेफ्टी
डिजाइन कैबिनेट अप्रूवल के बाद लागू की गई है। सिक्स लेन की निर्माणों की दूरी कई शहरों में इससे भी कम है।