
बचपन को जीने की आजादी सिखाता है नाटक 'तोत्तो-चानÓ
भोपाल। विहान ड्रामा वक्र्स की ओर से बुधवार शाम प्रशासन अकादमी में नाटक 'तोत्तो चान' की प्रस्तुति दी गई। युवा निर्देशक सौरभ अनंत द्वारा निर्देशित व तेत्सुको कुरोयानागी के 1981 में लिखे गए जापानी उपन्यास पर आधारित इस नाटक को देश भर में सराहना मिली है।
यह नाटक अपने मूल में बाल शिक्षा के उन अपरंपरागत विचारों को शामिल किए हुए है जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लेखिका तेत्सुको कुरोयानागी को अपने स्कूल तोमोए में शिक्षक 'सोसाकु कोबायाशीÓ से हासिल हुए।
इस नाटक के मंचनों नें दर्शकों के बीच प्राथमिक शिक्षा के एक आंदोलन की तरह प्रवेश किया है और विशेष रूप से शिक्षकों, अभिभावकों व शिक्षाविदों के बीच एक नयी लहर की तरह ये नाटक सामने आया है।
पिछले दिनों अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के आह्वान पर सर्व शिक्षा अभियान के सहयोग से विहान ने इस नाटक की एक विशेष प्रस्तुति भोपाल के सभी सरकारी स्कूल के शिक्षकों के लिए भी दी थी। जिसे शिक्षा विभाग तथा सारे शिक्षकों नें काफी सराहा।
उसके बाद पिछले माह विहान नाट्य समूह ने छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग के लिए छत्तीसगढ़ का 15 दिवसीय दौरा किया तथा नाटक तोत्तो-चान के मंचन छतीसगढ़ के भीतरी जिलों में किए। जिसके विशेष दर्शकों के रूप में लगभग चार से पांच हजार स्कूल के शिक्षक शामिल हुए थे।
तोमोए स्कूल में प्रकृति के बीच लगती हैं क्लासेज
नाटक की कहानी छोटी बच्ची 'तोत्तोÓ की है जो बहुत जिज्ञासाओं और कौतुहल से भरी खुशमिज़ाज लड़की है। पहली कक्षा में पढऩे वाली इस बच्ची को स्कूल से इसलिए निकाल दिया जाता है क्योंकि वह कक्षा में बैठकर खिड़की से बाहर झांकती है, चिडिय़ा से बातें करती है।
उसकी मां को फिर एक नया स्कूल तोमोए मिलता है । जहां हेडमास्टर बच्चो के मन को समझते हैं, बिना डांटे-मारे उनकी बात सुनते हैं उन्हें समझाते हैं। जहां पढ़ाई स्कूल के अंदर नहीं बल्कि प्रकृति के बीच होती है। पहाड़ों, बगीचों, नदियों, किनारों, जंगल में कक्षाएं लगती हैं। हर बात नाच-गाकर ताल-लय के साथ समझाई जाती है।
Published on:
03 Aug 2018 02:19 pm

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