पुलिस का फील्ड मूवमेंट घटा, 17 फीसदी बढ़ गए संगीन अपराध, लूट-हत्याएं बढ़ीं

साल 2018 के जनवरी-फरवरी की तुलना में इसी दरमियान 2019 में 417 गंभीर अपराध अधिक हुए

By: Sumeet Pandey

Published: 10 Mar 2019, 06:09 AM IST

भोपाल. सरकार, पुलिस के तमाम सुरक्षा दावों के बावजूद राजधानी में गंभीर अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। भोपाल पुलिस के आंकड़े बता रहे कि साल 2018 के जनवरी-फरवरी की तुलना में 2019 में इसी दरमियान 417 गंभीर अपराध अधिक हुए। मतलब, 2018 के मुकाबले करीब 17 फीसदी अधिक अपराध हुए। इसमें लूट-हत्या जैसे संगीन अपराधों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। अपराध बढऩे की मुख्य वजह पुलिस का फील्ड में मूवमेंट लगातार कम होना माना जा रहा है। हालात अब यह हो गए कि बीट प्रभारी से लेकर थाना प्रभारी तक फील्ड में मूवमेंट नहीं कर रहे हैं। जिससे अपराधी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं। हालात यह हैं कि कई थाना प्रभारियों को अपने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति तक पता नहीं है। आम लोगों के वे फोन तक नहीं उठाते।

जिन पर जोर वही अपराध बढ़े

हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती लूट, अपहरण, बलात्कार, नकबजनी-चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने पुलिस का अधिक जोर रहता है। लेकिन यही गंभीर अपराध ही कम नहीं हो रहे हैं। पुलिस ने अब तो लूट के अपराध में चोरी, हत्या की कोशिश में मारपीट की धाराएं लगाकर अपराध के आंकड़ों में कमी लाने का खेल कर रही है। शहर में इस तरह के कई मामले में पिछले दो माह में सामने आ चुके हैं।

 

अपराध बढऩे की पांच वजह
1. गश्त: पुलिस का गश्त सिस्टम पूरी तरह चरमरा चुका है। रात में गश्त हुई कम। अफसरों का फील्ड मूवमेंट भी घटा।

2. अपराधिक गिरोह: अपराध करने वाले अपराधियों की धरपकड़ कम हुई। फरारी के दौरान तक में अपराध कर रहे।
3. स्थांतरण: विधानसभा चुनाव के पहले-बाद में सैकड़ों पुलिसकर्मियों-अधिकारी-कर्मचारी के स्थांतरण हुए। फील्ड में पकड़ रखने वाले कर्मचारियों का विभाग में अभाव।

4. मेहरबानी: बीट प्रभारियों की तय जिम्मेदारी का पालन नहीं करा पाना। लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई न होना।
5. मुखबिरी: पुलिस का मुखबिरों से अधिक तकनीक पर भरोसा बढ़ा। पुलिस पर मुखबिरों का भरोसा कम हुआ। -------

इस तरह से बढ़े 2018 के मुकाबले 2019 में अपराध
लूट

2018: 15
2019: 26


हत्या

2018: 09
2019: 10

चोरी

2018: 695
2019: 754

अपहरण

2018: 91
2019:114

बलात्कार
2018: 44

2019:44
----

कुल गंभीर अपराध
2018: 2494

2019: 2911

( नोट: आंकड़े वर्ष 2018-19 में जनवरी-फरवरी में आईपीसी के तहत दर्ज अपराधों के हैं। चोरी के आंकड़ों में वाहन चोरी भी शामिल हैं।)

 

बेहतर गश्त प्रणाली से 2018 में 2017 के मुकाबले कम हुए थे अपराध

वर्ष 2018 में 2017 के मुकाबले जनवरी-फरवरी के बीच अपराधों का ग्राफ कम था। इसदरमियान 2017 में 2680 अपराध हुए थे, जबकि 2018 में 2494 अपराध दर्ज किए गए थे। अपराध में कमी आने की बड़ी वजह तत्कालीन डीआईजी संतोष सिंह की गश्त प्रणाली रही है। 14 जनवरी 2018 में संतोष सिंह के आईजी बनने के बाद डीआईजी धर्मेन्द्र चौधरी ने भी उस प्रणाली के जरिए अपराध में कमी लाने का फायदा मिला। हालांकि थोडी़ दिन बाद हालात के जस के तस हो गए।
 

Sumeet Pandey Desk
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