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कांग्रेस में सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला

भाजपा की काट के लिए कांग्रेस में बढ़ेगी दलित और पिछड़ों की हिस्सेदारी

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भोपाल

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Arun Tiwari

Aug 19, 2018

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congress

भोपाल. 15 साल से प्रदेश की सत्ता से बाहर कांग्रेस ने अपनी वापसी के लिए अब फिर से सोशल इंजीनियरिंग का रास्ता अपनाया है। भाजपा के ओबीसी आयोग बनाने और एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन की काट के लिए कांग्रेस संगठन में ओबीसी और दलितों का भागीदारी बढ़ाएगी। प्रदेश से लेकर जिला,ब्लॉक और बूथ तक की कमेटियों में ओबीसी और एससी,एसटी वर्ग को लेना अब जरुरी होगा।

संगठन के पुनर्गठन में इस बात का खास ध्यान रखा जाएगा कि कांग्रेस ने नीचे से उपर तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है या नहीं। भाजपा ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा और एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन कर ओबीसी और दलितों का लुभाने का बड़ा दांव चला है, जिसको भुनाने के लिए भाजपा ने पूरी तैयारी भी कर ली है, इसी की काट के लिए कांग्रेस संगठन में ये बदलाव कर रही है। - 'जिसकी जितनी संख्या भारी - उसकी उतनी हिस्सेदारीÓ प्रदेश में ५३ फीसदी पिछड़ा वर्ग की आबादी है जो सीधे-सीधे ९० सीटों पर असर रखती है, २१ फीसदी आदिवासी हैं तो १७ फीसदी दलितों की आबादी है, एससी-एसटी की प्रदेश में ८२ सीटें हैं। भाजपा के नए दांव के कारण कांग्रेस अपनी अब तक की मेहनत पर पानी नहीं फेरना चाहती।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पिछड़ा वर्ग के नेता अरुण यादव का नया नारा इन दिनों बहुत चर्चा में हैं, वे कहते हैं कि जिसकी जितनी संख्या भारी,उसकी उतनी हिस्सेदारी, यानी कांग्रेस पिछड़ों और दलितों को नजरअंदाज नहीं कर सकती। अरुण यादव के मुताबिक पीसीसी को पिछड़ा वर्ग को संगठन में,टिकट में और सरकार में हिस्सेदारी देनी पड़ेगी, इसके बिना जीतना संभव नहीं, भाजपा इसी वर्ग को साधकर तीन बार से सरकार बना रही है। - सामाजिक समरसता भोज- भाजपा की तर्ज पर अब कांग्रेस भी दलितों और आदिवासियों के बीच समरसता भोज करेगी। समन्वय यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह ने ये पहल की है जिसको कांग्रेस आगे बढ़ाएगी, प्रदेश की ८२ सीटों पर कांग्रेस के नेता गांव गांव में सामाजिक समरसता केंद्र बनाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि इन केंद्रों पर ज्यादा से ज्यादा सामूहिक भोज के कार्यक्रम हों जिनमें कांग्रेस के बड़े नेता मौजूद रहें।

सभी समाजों को साध रहे कमलनाथ - कमलनाथ ने सभी वर्गों को साधने पर भी फोकस किया है। वे सिंधी, स्वर्णकार, बंजारा, गुर्जर और यादव समाज सहित अल्पसंख्यकों से भी अलग-अलग मुलाकात कर चुके हैं। कमलनाथ पदाधिकारियों की पहली बैठक में ही यह कह चुके हैं कि वो सभी समाजों को प्रतिनिधित्व देंगे। - बड़े नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं के फोटो - कांग्रेस इस बात पर भी विचार कर रही है कि चुनाव प्रचार के पोस्टरों में बड़े नेताओं की ही तस्वीर होती है, लेकिन बड़े नेताओं के साथ यदि कांग्रेस वर्कर्स की तस्वीर भी छपने लगे तो उनमें ज्यादा उत्साह बढ़ेगा। जिला कांग्रेस कमेटी जिलों में इस तरह के पोस्टर छाप सकती है जिसमें बड़े नेताओं के साथ छोटे कार्यकर्ताओं की भी तस्वीर नजर आए। - वर्जन - - कांग्रेस सभी वर्गों को साथ लेकर चलती है, संगठन के पुनर्गठन में भी ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि बूथ से लेकर प्रदेश तक संगठन में सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। - -

कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस -