सात साल पहले 2016 में भी ऐसे ही स्थानों से कॉलोनियों में बाढ़ आई थी, जल भराव वाले जोन की 70 से ज्यादा कॉलोनियों में पानी भरने का खतरा देखते हुए उपाय के निर्देश, कलेक्टर ने 10 जून से पहले व्यवस्थाएं पूरी कर डेमो के निर्देश दिए
भोपाल. केरल में मानसून की सुगबुगाहट शुरु हो चुकी है। इससे राजधानी भोपाल में भी मानसून की तैयारियां की जाने लगी हैं हालांकि अभी यहां न तो नालों की सफाई हुई न ही अतिक्रमण हटाए गए हैं। यहां तक कि जर्जर भवनों की सूची भी फाइलों में कैद कर दी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि भोपाल में 24 जून के बाद कभी भी मानसून दस्तक दे सकता है। ऐसे में लोगों को बरसात में पानी भरने का डर सताने लगा है।
राजधानी में जलभराव वाले 16 डेंजर जोन हैं। यहां की 70 से ज्यादा कॉलोनियों में बरसात के मौसम में जलभराव की स्थिति बन सकती है। शहर के 14 नालों में सफाई और गाद निकालने की जरूरत है। इस संबंध में कलेक्टर आशीष सिंह ने व्यवस्थाएं करने के निर्देश देकर आपदा कंट्रोल रूम बनाने को कहा है।
सालों से नालों से अतिक्रमण भी नहीं हटा
बैठक में समय पूर्व सड़कों के गड्ढे भरने के निर्देश भी कलेक्टर ने दिए हैं। चंद सड़कों को छोड़कर कहीं भी शहर में रेस्टोरेशन नजर नहीं आ रहा है। 400 किमी से ज्यादा सड़कों पर अभी भी काम की जरूरत है। समय पर काम पूरा नहीं हुआ तो जनता बरसात में सड़कों पर बिखरी गिट्टी, गड्ढों में हिचकोले खाएगी।
ये हैं डेंजर जोन, क्षेत्र की कॉलोनियां
जलभराव वाले क्षेत्र छान, बागमुगालिया, जाटखेड़ी, नाला क्षेत्र, छोला, भानपुर, रासलाखेड़ी, शिवनगर, निशातपुरा, नेवरी, पंचशील नगर व शहरी क्षेत्र की झुग्गी बस्तियों सहित 16 क्षेत्र जलभराव के डेंजर जोन हैं। इन्हीं के नालों और जलभराव वाले स्थानों से सटी 70 से ज्यादा कॉलोनियों में जलभराव होता है। वर्ष 2016 में भी ऐसे ही स्थानों से कॉलोनियों में बाढ़ आई थी।
बांध, डेम किनारे रह रहे लोगों का विस्थापन जरूरी
इधर छोटे पुल, पुलिया एवं रपटा पर संबंधित विभागों को सूचना के बोर्ड लगाने को कहा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों के सरपंच, सचिव, पटवारी, पटेल, कोटवार, जनप्रतिनिधि वाट्सएप ग्रुप बनाने को कहा गया है ताकि विषम परिस्थितियों में संदेश आसानी से पहुंच सकें। कलेक्टर ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को बांध के पानी से आने वाली बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने को भी कहा है।