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नहीं रहे नेता जी- जानें मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक सफर

- मुलायम सिंह से जुड़ी हर वो बात जो आप जानना चाहते हैं, यहां पढ़ें- मप्र से जुड़ी उनकी यात्रा- 2003 में सपा बनी थी मध्यप्रदेश की तीसरी बड़ी पार्टी

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समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्‍तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का जन्‍म 22 नवंबर 1939 को इटावा जिले के सैफई गांव में उनका जन्‍म हुआ था। वे 82 वर्ष के हो गए हैं। लेकिन राजनीति में उनका दबदबा आज भी कायम है। राजनीति में उनका सफर (Mulayam Singh Yadav political journey) काफी लंबा रहा हैं। 1967 में पहली बार विधान सभा के सदस्य के रूप में चुने गए थे। हालांकि 15 वर्ष की आयु में उन्‍होंने पहलवान बनने का सपना देखा था। बाद में उन्होंने अपना इरादा बदल लिया।

वहीं उत्तर प्रदेश से अपनी समाजवादी पार्टी को बाहर भी फैलाने के तहत साल 2003 में समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी भाग लिया जहां उनको 7 सीटें प्राप्त हुई। इन 7 सीटों क साथ सपा मध्यप्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी। पूर्व में विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी का प्रचार करने भी मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) मध्य प्रदेश के बालाघाट में चुनावी जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे।

इससे पहले समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की पत्नी साधना गुप्ता (Sandhna Gupta) का तीन माह पहले ही शनिवार, 9 जुलाई 2022 दोपहर निधन हो गया है, वह फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित थीं। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। साधना गुप्ता, बीजेपी नेत्री अपर्णा यादव की सास और प्रतीक यादव की मां थीं।

जबकि इससे पूर्व साल 2003 में मुलायम सिंह (Mulayam Singh Yadav) की पहली पत्नी और अखिलेश यादव की मां मालती देवी का निधन हो गया था। जिसके कुछ दिन बाद सपा नेता ने खुद से 20 साल छोटी साधना गुप्ता को दूसरी पत्नी का दर्जा दिया था। वहीं आज यानि 10 अक्टूबर 2022 (कार्तिक माह की प्रतिपदा) को मुलायम सिंह का सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर मेदांता अस्पताल के आइसीयू में निधन (Death of Mulayam Singh Yadav) हो गया।

मप्र से कौन क्या बोला
जिसके बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (cm shivraj singh chauhan) समेत प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है और उनके साथ बिताए पलों को याद किया।
- मुलायम सिंह यादव जी जमीन से जुड़े हुए नेता थे। जब हमने अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया, तब मुलायम सिंह (Mulayam Singh Yadav) के साथ कई बार विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। उनके दुखद निधन पर शोकाकुल परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं।
।। ॐ शांति ।।

- मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह (Mulayam Singh Yadav) के निधन पर अत्यंत दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने ट्वीट संदेश में कहा है कि देश के पूर्व रक्षामंत्री, उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक श्री मुलायम सिंह यादव के निधन का समाचार अत्यंत दु:खद है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में विश्रांति दें व शोकाकुल परिजनों को इस कठिन घड़ी में संबल प्रदान करें।

- इधर, मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्र ने भी मुलायम सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव जी का निधन दुखद है। उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके परिजनों और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदना है।

तो चलिए जानते हैं मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) से जुड़ी कुछ खास बातें -
मुलायम सिंह यादव ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव से ही की। इसके बाद आगरा यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस में पढ़ाई। और पढ़ाई के दौरान उनका लक्ष्य बदल गया। पहले वह पहलवान का सपना देख रहे थे। लेकिन अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने भारतीय समाजवादी राम मनोहर लोहिया के बारे में जाना, उनके राजनीतिक सफर के बारे में पढ़ा और राजनीति में जाने का मन बना लिया। इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे एक प्रमुख राज के तौर पर अपनी पहचान रखते हैं।

मुलायम सिंह (Mulayam Singh Yadav) उत्तर भारत के बड़े समाजवादी और किसान नेता हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्म लेने वाले मुलायम सिंह ने अपना राजनीतिक जीवन (Mulayam Singh Yadav political journey) उत्तर प्रदेश में विधायक के रूप में शुरू किया। बहुत कम समय में ही मुलायम सिंह (Mulayam Singh Yadav) का प्रभाव पूरे उत्तर प्रदेश में नज़र आने लगा। मुलायम सिंह ने उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग समाज का सामाजिक स्तर को ऊपर करने में महत्वपूर्ण कार्य किया। सामाजिक चेतना के कारण उत्तर प्रदेश की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग का महत्वपूर्ण स्थान हैं। समाजवादी नेता रामसेवक यादव के प्रमुख अनुयायी (शिष्य) थे तथा इन्हीं के आशीर्वाद से मुलायम सिंह 1967 में पहली बार विधान सभा के सदस्य चुने गये और मंत्री बने।

- सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) हैं। 4 अक्टूबर 1992 में उन्होंने सपा की स्थापना की।
-मुलायम सिंह यादव ने भी इमरजेंसी के दौरान जेल की हवा खाई।
-1975 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। लंबे वक्त तक उन्हें जेल में रखा गया था।
- सपा पार्टी से पूर्व वह 1977 में यूपी के पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष चुने गए थे।
- एच डी देवगौड़ा की सरकार में देश के रक्षा मंत्री रहे। 1 जून 1996 से लेकर 19 मार्च 1998 तक रक्षा मंत्री का पद संभाला था
- मुलायम सिंह यादव 3 कार्यकाल (Mulayam Singh Yadav political journey) तक यूपी के मुख्यमंत्री रहे। हालांकि विवादों में तब गिर गए जब उन्होंने बलात्कार पर विवादित बयान दिया था। मुलायम सिंह ने कहा था कि लड़कों से गलती हो जाती है।
-1982 से 1985 तक विधान परिषद के सदस्य और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में रहें।
- मुलायम सिंह यादव 1989 से 1991 तक, 1993 से 1995 तक और साल 2003 से 2007 तक तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं।

वंशवाद को कोसते थे
हालांकि बहुत कम लोगों को याद होगा कि 80 के दशक तक अपने राजनीतिक आका चरण सिंह के साथ मिलकर वह इंदिरा गांधी को वंशवाद के लिए कोसने का कोई मौका छोड़ते भी नहीं थे। हालांकि बाद में धीरे धीरे वंशवाद को इतने लचीले होते गए कि खुद अपने बेटे और कुनबे को राजनीति में बडे़ पैमाने पर आगे बढ़ाने के लिए भी जाने गए।

चौधरी चरण सिंह से क्षुब्ध हो गए थे तब
चौधरी चरण सिंह से तब वह क्षुब्ध हो गए थे जबकि उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल में मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के जबरदस्त असर और पकड़ के बाद भी अमेरिका से लौटे अपने बेटे अजित सिंह को पार्टी की कमान देनी शुरू कर दी।

हवा को भांपने की गजब की क्षमता
इसमें कोई शक नहीं कि वह जिस बैकग्राउंड से राजनीति में आए और मजबूत होते गए, उसमें उनकी सूझबूझ थी और हवा को भांपकर अक्सर पलट जाने की प्रवृत्ति भी। कई बार उन्होंने अपने फैसलों और बयानों से खुद ही अलग कर लिया। राजनीति में कई सियासी दलों और नेताओं ने उन्हें गैरभरोसेमंद माना लेकिन हकीकत ये है कि यूपी की राजनीति में वह जब तक सक्रिय रहे, तब तक किसी ना किसी रूप में अपरिहार्य बने रहे।

राजनीति के दांवपेच लोहिया और चरण सिंह से सीखे
राजनीति के दांवपेंच उन्होंने 60 के दशक में राममनोहर लोहिया और चरण सिंह से सीखने शुरू किए। लोहिया ही उन्हें राजनीति में लेकर आए। लोहिया की ही संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने उन्हें 1967 में टिकट दिया और वह पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे। उसके बाद वह लगातार प्रदेश के चुनावों में जीतते रहे। विधानसभा तो कभी विधानपरिषद के सदस्य बनते रहे।

उनकी पहली पार्टी अगर संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी थी तो दूसरी पार्टी बनी चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाली भारतीय क्रांति दल. जिसमें वह 1968 में शामिल हुए। हालांकि चरण सिंह की पार्टी के साथ जब संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का विलय हुआ तो भारतीय लोकदल बन गया। ये मुलायम के सियासी पारी की तीसरी पार्टी बनी।

सदस्यता : (Mulayam Singh Yadav political journey)
विधान परिषद 1982-1985
विधान सभा 1967, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 (आठ बार)
विपक्ष के नेता, उत्तर प्रदेश विधान परिषद 1982-1985
विपक्ष के नेता, उत्तर प्रदेश विधान सभा 1985-1987
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री
सहकारिता और पशुपालन मंत्री 1977
रक्षा मंत्री 1996-1998

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यकाल-
: 5 दिसम्बर 1988 – 24 जून 1991
: 5 दिसम्बर 1993 – 3 जून 1995
: 29 अगस्त 2003 – 13 मई 2007

भारत के रक्षा मंत्री-
: 1 जून 1996 – 19 मार्च 1998

पुरस्कार व सम्मान
पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) को 28 मई, 2012 को लंदन में 'अंतर्राष्ट्रीय जूरी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ़ जूरिस्ट की जारी विज्ञप्ति में हाईकोर्ट ऑफ़ लंदन के सेवानिवृत न्यायाधीश सर गाविन लाइटमैन ने बताया कि श्री यादव का इस पुरस्कार के लिये चयन बार और पीठ की प्रगति में बेझिझक योगदान देना है। उन्होंने कहा कि श्री यादव का विधि एवं न्याय क्षेत्र से जुड़े लोगों में भाईचारा पैदा करने में सहयोग दुनियाभर में लाजवाब है।

ज्ञातव्य है कि मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने विधि क्षेत्र में ख़ासा योगदान दिया है। समाज में भाईचारे की भावना पैदाकर मुलायम सिंह यादव का लोगों को न्‍याय दिलाने में विशेष योगदान है। उन्होंने कई विधि विश्‍वविद्यालयों में भी महत्त्वपूर्ण योगदान किया है।

अयोध्या गोलीकांड
वीएचपी के आह्वान पर 30 अक्तूबर 1990 को लाखों कारसेवक अयोध्या में इकट्ठा हुए थे। उनका उद्देश्य था कि विवादित स्थल पर मस्जिद को तोड़कर मंदिर का निर्माण किया जाए। जब हजारों की संख्या में लोग विवादित स्थल के पास की एक गली में इकट्ठा हुए, उसी वक्त सामने से पुलिस और सुरक्षाबलों ने गोली चला दी। इसमें कई लोग गोली से तो कई लोग भगदड़ से मारे और घायल हुए। हालांकि मौतों के आंकड़े कभी स्पष्ट नहीं हुए।

रामजन्मभूमि थाने के तत्कालीन एसएचओ वीर बहादुर सिंह ने बताया कि कारसेवकों के मौत का जो आंकड़ा बताया गया था, उससे ज्यादा कारसेवकों की मौत हुई थी। राम जन्मभूमि थाने के तत्कालीन एसएचओ वीर बहादुर सिंह ने इस टीवी चैनल से बातचीत में बताया कि घटना के बाद विदेश तक से पत्रकार आए थे। उन्हें आठ लोगों की मौत और 42 लोगों के घायल होने का आंकड़ा बताया गया था। जब तफ्तीश के लिए शमशान घाट गए, तो वहां पूछा कि ऐसी कितनी लाशें हैं, जो दफनाई गई हैं और कितनी लाशों का दाह संस्कार किया गया है, तो बताया गया कि 15 से 20 लाशें दफनाई गई हैं।

उसी आधार पर सरकार को बयान दिया गया था। हालांकि हकीकत यही थी कि वे लाशें कारसेवकों की थीं। उस गोलीकांड में कई लोग मारे गए थे। आंकड़े तो नहीं पता हैं, लेकिन काफी संख्या में लोग मारे गए थे। टीवी चैनल के इस सवाल पर कि कई लोग अपनों के बारे में पूछते हुए अयोध्या तक आए होंगे, उन्हें क्या बताया जाता था। पूर्व एसएचओ ने बताया कि उन्हें बताते थे कि दफनाई गई लाशें उनके परिवार के सदस्यों की नहीं हैं। मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) भी कई मौकों पर इस गोलीकांड को सही ठहराते रहे हैं। उन्होंने हमेशा कहा है कि देश की एकता के लिए गोली चलवाई थी। आज जो देश की एकता है उसी वजह से है। इसके लिए और भी लोगों को मारना पड़ता, तो सुरक्षाबलों को मारने की अनुमति दे देते।

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