
भोपाल. कोरोना के दो साल आम जन के साथ मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर्स पर भी भारी पड़े। दरअसल, कोरोना काल 2020 व 2021 में पीजी कर रहे डॉक्टर्स को न तो ऑपरेशन का मौका मिला न ही वे वार्डों में दूसरी बीमारियों के मरीजों को देख पाए। इस दौरान इन डॉक्टर्स ने सिर्फ कोरोना ही देखा और समझा। हालात ऐसे बने कि दो साल तक प्रैक्टिकल किए बिना ये छात्र ऑनलाइन पढ़ाई के दम पर डॉक्टर बन गए। अब इन डॉक्टरों को वार्ड ड्यूटी के दौरान प्रैक्टिकल अनुभव की कमी आड़े आएगी। सबसे ज्यादा नुकसान 2019 के बैच में दाखिला लेने वाले रेजिडेंट््स डॉक्टर को हुआ। वहीं 2020 के बैच को भी प्रैक्टिस के लिए 6 महीने ही मिले।
ईएनटी ओर दंत रोग के छात्रों को भरपूर मौके
कोरोना काल के दौरान ब्लैक फंगस तेजी से बढ रहा था। ऐसे में नाक, कान, गला यानी ईएनटी और दंतरोग विभाग के छात्रों को खासा फायदा हुआ। ईएनटी विभाग में हर रोज ब्लैक फंगस के जटिल ऑपरेशन हुए। ऐसे में छात्रों ने वह सब कुछ सीखा जो सामान्य पाठ्यक्रम में शायद ही पढ़ पाते। इस तरह दंत रोग के छात्रों को ऑपरेशन के भरपूर मौके मिले।
सर्जरी से जुड़े छात्रों को ज्यादा नुकसान
कोरोना की पहली लहर में मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में ऑपरेशन पूरी तरह बंद थे। वहीं दूसरी लहर में अस्पताल में सामान्य मरीजों का इलाज तो चालू था, लेकिन कोरोना के चलते वे अस्पताल नहीं पहुंच रहे थे। लिहाजा सर्जरी से संबंधित विभाग जैसे यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजी व गेस्ट्रोलॉजी विभाग के रेजिडेंट््स को ऑपरेशन का मौका नहीं मिला। वहीं जनरल सर्जरी, यूरोलॉजी व गेस्ट्रो के मरीजों की ड्यूटी कोरोना वार्ड में लगाई गई। इन्होंने भी दो साल तक सिर्फ कोरोना के मरीजों का इलाज किया।
ऐसा होता है पीजी का पाठ्यक्रम
फस्र्ट ईयर : मरीजों को देखना और वार्ड का राउंड
सेकंड ईयर : वार्ड ड्यूटी के साथ माइनर सर्जीकल प्रोसीजर
थर्ड ईयर : यह सबसे महत्पूर्ण, मेजर सर्जिकल प्रोसीजर
ऐसे खराब हुए दो साल
2019 बैच: इस बैच ने 2019 जून-जुलाई में दाखिला लिया। शुरुआती छह माह तो बेसिक कोर्स में निकल गए। 2020 में सेकंड ईयर में आए तो कोरोना की लहर आ गई। 2021 में जब थर्ड ईयर आया तो दूसरी लहर आ गई। दो साल पूरे कोरोना में निकल गए।
2020 बैच : जब यह बैच आया तो कोरोना चल रहा था। फस्र्ट इयर और सेकंड ईयर पूरी तरह कोरोना में गुजर गए। फाइनल ईयर अभी खत्म हुआ है, लेकिन आखिरी समय में छात्र थ्योरी और प्रैक्टिकल के बीच उलझ गए।
वर्ष 2020 में आई पहली लहर में 2019 के मुकाबले आधे ही ऑपरेशन हुए
विभाग 2019 2020
जनरल सर्जरी 2145 1021
ऑर्थोपेडिक 2245 1425
ईएनटी 1024 425
न्यूरो सर्जरी 875 541
यूरोलॉजी 1245 ३25
प्रदेश में पीजी सीटों की स्थिति
भोपाल 56
इंदौर 82
ग्वालियर 55
जबलपुर 57
रीवा 27
सागर 1३
कुल 290
डॉक्टर सक्षम, सीख जाएंगे
कोरोना काल के दौरान बच्चों को कई महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित होना पड़ा, लेकिन रेसीडेंट डॉक्टर इतने सक्षम होते हैं कि कुछ ही महीनों में यह सब सीख जाएंगे। बस उन्हेें थोडे अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। हालांकि कोरोना से कुछ फायदा भी हुआ। छात्र विपरीत परिस्थितियों में बेहतर काम करना सीख गए। इन युवा चिकित्सकों ने जो सीखा वे शायद कभी न सीख पाते।
-डॉ. अरविंद राय, विभागाध्यक्ष और डीन गांधी मेडिकल कॉलेज
Published on:
20 Apr 2022 08:19 am

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