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 #World Heritage Day: यहां आज भी गुलजार है 250 साल पुरानी बगिया

17 और 18 शताब्दी में इस्लाम नगर की स्थापना हुई थी। यहां मुगलों की चार बाग शैली में गार्डन का निर्माण कराया गया। जिन्हे आज भी संजोकर रखा गया है।

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Juhi Mishra

Apr 18, 2016

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भोपाल। 100 साल पुराने बरगद, 150 साल पुराने पीपल के पेड़ों से जुड़े जाने कितने ही किस्से हमने सुन रखे हैं। लेकिन भारत के इतिहास में भोपाल के नजदीक बसा इस्लाम नगर 250 साल पुराने मुगल सभ्यता के फूलों को आज भी अपनी गोद में खिलाए हुए है।


ऐसे जगदीशपुर बना इस्लाम नगर
17वीं और 18वीं सदी में भोपाल शाही राज्य की राजधानी रहे इस्लाम नगर की दीवारें अब दरकने लगीं हैं लेकिन यहां के गार्डन में खिले फूल आज भी जाता हैं। बैरसिया रोड़ पर स्थित इस्लाम नगर का इतिहास गौरवशाली रहा है। इस्लामनगर का मूल नाम जगदीशपुर था, जहां एक समय में राजपूतों का शासन हुआ करता था। 18वीं शताब्दी में अफगान कमांडर दोस्त मोहम्मद खान यहां आए और इस कस्बे को अपने अधीन कर लिया। उन्होंने इसका नाम इस्लामनगर रखा। दोस्त मोहम्मद ने भोपाल शाही राज्य की स्थापना की और इस्लामनगर को उसकी राजधानी बनाया।


दो सभ्यताओं का मेल दिखता है यहां
इस्लाम नगर में राजपूत, मालवा शैली और मुगल सभ्यता का सम्मिश्रण साफ दिखायी देता है। महलों के निर्माण की शैली हो या उद्यानों के बनाने का तरीका, यहां तक की फूल और पेड़ों का चुनाव भी शासकों ने अपने ढंग से किया था। इस्लामनगर में चमन महल, रानी महल, गोंड महल, शाही हमाम तथा मुगलों की चार बाग शैली में निर्मित मुगल गार्डन बेहद खूबसूरत हैं।


खास है चारबाग शैली
इस्लाम नगर में चार बाग शैली में बना मुगल उघान नायब है। इतिहासकार अहमद सिद्दकी बताते हैं कि हैदराबाद के बाद भोपाल ही इस्लाम बाहुल क्षेत्र था। इसलिए चार बाग शैली के ज्यादातर उद्यान या तो हैदराबाद और उसके आसपास हैं या भोपाल के इस्लाम नगर में। यहां ज्यामितीय आकार के विन्यास में फल और फूलों के वृक्ष लगाए गए हैं। संतुलित और व्यवस्थित भू-खंडों में फूलदार झाडिय़ाँ लगायी गईं। इस्लाम नगर के चार बाग की तुलना कश्मीर के मुगल बाग से किया जाना अतिशियोक्ति नहीं है। निशांत बाग, शालीमार, चश्माशाही, वेरीनाग और अच्चाबल उद्यान भी इस्लाम नगर के चार बाग की तर्ज पर तैयार किए गए।


निराली है चमन महल की बात
इस्लाम नगर में बने चमन महल को गार्डन पैलेस भी कहा जाता है। इस भव्य महल को 1715 में बलुआ पत्थर की मदद से अफगान कमांडर दोस्त मोहम्मद खान ने बनवाया था। इसके बाद उन्होंने कुछ साल इस्लामनगर पर शासन भी किया था।


12 दरवाजों वाला शीशमहल
मुगल शासकों के बनांए महलों में शीश महल सबसे खास होता है। इस्लाम नगर के शीश महल में 12 दरवाजे हैं। मालवा और मुगल शैली को मिलाकर शीश महल का डिजाइन तैयार किया गया। इतिहासकार अहमद सिद्दकी बताते हैं कि शीश महल को वास्तुशिल्प के आधार पर तैयार किया गया था। यहां की शीशों पर भी फूलदार नक्काशी की गई है।

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