
भोपाल@रूपेश मिश्रा
वैसे मध्यमवर्गीय परिवारों की सोच अब वक्त के साथ धीरे- धीरे बदल रही है। लेकिन बच्चों के मामले में अभी भी ज्यादातर माता-पिता ऐसे ही ख्यालात रखते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई- लिखाई कर डॉक्टर, इंजीनियर बनकर परिवार का नाम रोशन करे। ठीक ऐसी ही चुनौती शास्त्रीय नृत्यांगना मोहिनी यादव के सामने भी आई थी। लेकिन अपने जिद और जुनून के सामने आखिर में उनके इस ख्वाब को उनके घरवालों ने भी स्वीकार किया। दरअसल मोहिनी ने बताया वो पिछले 16 सालों से भारत नाट्यम कर रही हैं। लेकिन उनके पिता हमेशा से चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़ाई लिखाई कर बैंक मैनेजर बने। लेकिन मेरा सपना भरत नाट्यम सीखने का रहा है। जो अब सच हो रहा है। मोहिनी ने कहा कि उनके इस सफर में उनकी माता ने हमेशा सहयोग किया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता नहीं चाहते थे वो नृत्य को अपना करियर बनाए लेकिन आखिरकार बेटी का जुनून के आगे उन्हें भी झुकना पड़ा।
प्रयागराज से ही भरतनाट्यम की पढ़ाई
किसी भी विधा में महारथ हासिल करने के लिए मन और लगन से उसकी बारिकीयां सिखनी होती है। लिहाजा भरत नाट्यम की बारिकी सीखने के लिए मोहिनी ने 6 साल का बीए अपने गुरू श्वेता द्रिवेदी के सानिध्य में सीखा और उसके बाद दो साल का एमए करने के लिए प्रयागराज चली गई। मोहिनी ने बताया कि भले ही वो भरतनाट्यम सीखने प्रयागराज चली गईं लेकिन उनके गुरू का ज्ञान हमेशा उन्हें मिलता रहा।
बड़े स्टेजों में परफॉर्म करता देख पिता को हुआ गर्व का अहसास
मोहिनी ने कहा कि अक्सर पिता जी को लगता था भरत नाट्यम से क्या होगा। अच्छी नौकरी करना ही सफलता का पैमाना है। लेकिन जब मेरे पिता ने मुझे जी- 20 सहीत कई बड़े मंचों पर परफॉर्म करते देखा तो उन्हें लगा कि मैं जीवन में आगे कुछ जरूर सफलता हासिल कर पाऊंगी, तब उन्हें बेहद गर्व महसूस हुआ।
Published on:
31 Jul 2023 08:07 pm

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