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आरोपियों के नाम छिपा रहे अफसर, पुलिस को नहीं सौंपा केस

सूचना के अधिकार के तहत आवेदन कर शिकायत की जानकारी मांगी। हरकत में आए राज्य निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर 2017 में समिति गठित की।

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भोपाल। महिला सहकर्मी को अश्लील संदेश सहित यौन उत्पीडऩ करने वाले राज्य निर्वाचन आयोग के पांच कर्मचारी दोषी करार दिए गए हैं, लेकिन महिला गरिमा की आड़ में आयोग के अफसरों ने आरोपियों का नाम बताने से इनकार कर दिया है। विभागीय कार्रवाई का बहाना कर प्रकरण पुलिस को नहीं भेजे गए। इस पूरे घटनाक्रम से राज्य निर्वाचन आयोग की पोल भी खुली है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिसंबर 2013 में ही सभी संस्थानों में महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडऩ रोकने के लिए समिति गठित करना अनिवार्य किया गया था। जबकि, आयोग में कार्यरत महिला ने जुलाई 2017 में सहकर्मियों द्वारा उत्पीडऩ की शिकायत की थी।

जांच में पाए गए 5 दोषी

तीन माह के टालमटोल के बाद अक्टूबर में समिति गठित कर सुनवाई की गई। जांच में पांच कर्मचारी दोषी पाए गए। जिनपर वेतनवृद्धि रोकने सहित विभागीय कार्रवाई की गई। आरटीआई एक्टीविस्ट अजय दुबे ने आरोपियों के खिलाफ की गई जांच और कार्रवाई का ब्योरा मांगा, तो आयोग की सचिव सुनीता त्रिपाठी ने कहा कि महिला की गरिमा, प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता भंग होने की आशंका के चलते जानकारी नहीं दी जा सकती।

ऐसे हुआ खुलासा
आयोग की महिला कर्मचारी की शिकायत के पहले संस्थान में कोई समिति ही नहीं थी। उसका आवेदन अलग-अलग जगहों पर घूमता रहा। जानकारी मिलने पर अजय दुबे ने सितंबर 2017 में सूचना के अधिकार के तहत आवेदन कर शिकायत की जानकारी मांगी। इससे हरकत में आए राज्य निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर 2017 में समिति गठित की। महिला कर्मचारी ने बयान के साथ मोबाइल पर भेजे गए अश्लील और अपमानजनक मैसेज, वीडियो क्लिप्स व अन्य साक्ष्य सौंपे। इसी आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया।

जुर्माने का है प्रावधान
कार्यस्थल पर महिलाओं की निजता के संरक्षण के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन दिसंबर 2013 में ही अनिवार्य किया गया था। नहीं तो 50 हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग में अक्टूबर 2017 तक कमेटी नहीं थी। आनन-फानन में बनी कमेटी में एक सामाजिक कार्यकर्ता को शामिल किए जाने के लिए महिला बाल विकास विभाग को पत्र लिखा गया था, लेकिन विभाग ने अभी तक नाम नहीं भेजा।

इस मामले में कड़ी कार्रवाई की गई है। फोन पर विस्तृत जानकारी दे पाना संभव नहीं है। अभी भोपाल से बाहर हूं, कार्यालय में ही विवरण दिए जा सकते हैं।
- आर परशुराम, आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग मप्र

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