
22 दिन में दो बैठकों में जनता से जुड़े 7 बड़े फैसले, अमल एक पर नहीं हुआ
भोपाल. राजधानीवासियों को राहत देने के नाम पर कलेक्टोरेट में आला अफसरों की मौजूदगी में बैठकें होती हैं। शहरहित में कई बड़े फैसले लिए जाते हैं, पर विभागीय तालमेल नहीं होने से अमल नहीं होता। 22 दिनों में दो बड़ी बैठकों में शहर के सात बड़े मुद्दों को लेकर रणनीति बनी, लेकिन उसके बाद सब भुला दिया गया। बैठक की औपचारिकता पूरी हो गई, जनता की समस्याएं जस की तस हैं। ये तो सिर्फ 22 दिन का रिपोर्ट कार्ड है। थोड़ा पीछे जाने पर जिला योजना समिति, सडक़ सुरक्षा समिति, जिला समन्वय समिति जैसे छह समूहों की बैठकें हो चुकी हैं। इनमें बड़े फैसलों के दावे किए गए, लेकिन लाभ जनता को नहीं मिला।
्रमतदाता परेशान: वोटर कार्ड के लिए कलेक्टोरेट में रोज बैठक हो रही है। फिर भी जनता बूथ और एसडीएम कार्यालयों के चक्कर लगा रही है। दो माह पहले आवेदन करने वालों को वोटर कार्ड नहीं मिले हैं। 55 हजार कार्ड अभी छपे नहीं हैं।
12 मार्च: कलेक्टोरेट में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए बैठक
01. सिग्नल व्यवस्था आज भी बेपटरी
निगम और ट्रैफिक पुलिस को शहर के 61 में से खराब सिग्नलों की जानकारी आईटीएमएस को देनी थी, ताकि ठीक हो सकें। एक दिनअमल हुआ। बोर्ड ऑफिस से न्यू मार्केट तक सिग्नल सिन्क्रोनाइज्ड नहीं हुए।
02. सडक़ किनारे वाहनों का जमघट
सडक़ किनारे बेतरतीब खड़े वाहन बड़ी समस्या हैं। बैठक में कलेक्टर, डीआईजी, निगमायुक्त ने अभियान चलाने की बात कही, लेकिन भूल गए। नतीजा पूरा शहर अवैध पार्किंग पटा हुआ है। लोग परेशान।
03. सडक़ों पर नहीं लगे डिवाइडर
चेतक ब्रिज और पॉलीटेक्निक से प्रोफेसर कॉलोनी तक डिवाइडर बनाने की बात हुई। निगम और ट्रैफिक पुलिस को काम करना था। शहर की 15 और सडक़ों पर ट्रैफिक व्यविस्थित करना था। कहीं भी काम शुरू नहीं हुआ।
04. आज भी जस के तस हैं ब्लैक स्पॉट
बोर्ड ऑफिस चौराहा, गोविंदपुरा चौराहा, भदभदा चौराहा, पुलिस कंट्रोल रूम तिराहा, लालघाटी चौराहा समेत सात ब्लैक स्पॉट हैं। पीडब्ल्यूडी को ठीक कराना है, लेकिन अफसर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं।
8 मार्च: शांति समिति की बैठक में 3 फैसले
1. रेलवे फाटक पर जाम
बावडिय़ा और करोंद रेलवे फाटक बंद होने पर कई बार जाम लगता है। बैठक में डीआईजी ने दोनों फाटकों पर फोर्स लगाकर ट्रैफिक दुरुस्त करने की बात कही थी। आदेश संबंधित थाने नहीं पहुंचा।
2. नॉनवेज दुकानों का मुद्दा
बैठक में नॉनवेज दुकानों पर लगाम कसने, जमघट और शराबखोरी पर रोक लगाने की मांग उठी। आश्वासन मिला पर काम नहीं हुआ।
3. घाट का काम शुरू नहीं
मूर्तियां विसर्जन के लिए रानी कमलापति घाट बनाने का मामला बैठक में उठा, कलेक्टर और निगम कमिश्नर ने कहा कि जल्द ही इस पर काम शुरू होगा। बैठक से बाहर निकलते ही अधिकारी इस बात को भी भूल गए।
अधिकारी बैठकों में आश्वासन देते हैं, जमीन पर काम दिखाई नहीं देता। चाहे सडक़ का मामला हो या ट्रैफिक का। 6 अप्रैल से नवरात्र हैं, कमलापति घाट का काम शुरू नहीं हुआ। शीतलदास की बगिया में विसर्जन करेंगे।
प्रमोद नेमा, सदस्य, शांति समिति
नॉनवेज दुकानें किस नियम के आधार पर खुल रही हैं। शांति समिति की बैठक में मामला रखा था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
ललित जैन, सदस्य, शांति समिति
बैठकों में जो मुद्दे उठते हैं, उनका पालन कराया जाता है। व्यस्तता के कारण देर हो जाती है।
डॉ. सुदाम खाडे, कलेक्टर
&बावडिय़ा-करोंद रेलवे फाटक पर टै्रफिक व्यवस्थित करने फोर्स नहीं है... मैं दिखवाता हूं।
इरशाद वली, डीआईजी
Updated on:
30 Mar 2019 01:31 am
Published on:
30 Mar 2019 04:04 am
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