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सिंधिया बनाम केपी यादव: सोशल मीडिया वॉर के बाद संगठन ने संभाली कमान

mp politics: डॉ. केपी यादव के निगम अध्यक्ष बनने के बाद भाजपा के भीतर गुटबाजी और तेज हो गई। यहां पढ़ें विस्तार से...।

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भोपाल

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Manish Geete

May 15, 2026

jyotiraditya scindia kp yadav

mp politics: गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में भाजपा की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों तक पहुंच गई है। पूर्व सांसद डॉ. केपी यादव को मध्यप्रदेश राज्य खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से शुरू हुई बयानबाजी ने अब संगठन को हस्तक्षेप के लिए मजबूर कर दिया है। हालात यह हैं कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉ. केपी यादव समर्थकों के बीच चल रही सियासी जंग पर भाजपा ने अनुशासन का डंडा चला दिया है। दोनों खेमों से जुड़े नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया गया है।

दरअसल, डॉ. केपी यादव के निगम अध्यक्ष बनने के बाद भाजपा के भीतर गुटबाजी और तेज हो गई। सोशल मीडिया पर समर्थकों के जरिए शक्ति प्रदर्शन शुरू हो गया। इसी क्रम में केपी यादव समर्थक और भाजपा मंडल उपाध्यक्ष कृष्णपाल यादव ने सोशल मीडिया पर विवादित टिप्पणी करते हुए लिखा कि कोई माने या न माने, दो साल तो केपी यादव मंत्री हैं। पहले भी दबदबा था और आगे भी रहेगा। ये इतिहास ही लिखते हैं, जैसा 2019 में लिखा था। भाजपा संगठन ने इस पोस्ट को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए सख्त रुख अपनाया।

तीन दिन में मांगा जवाब

भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार के निर्देश पर जिला महामंत्री संतोष धाकड़ ने कृष्णपाल यादव को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। नोटिस में साफ कहा है कि इस तरह की टिप्पणियों से पार्टी की छवि धूमिल हो रही है और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर सिंधिया समर्थक नेता कृष्णा घाडगे ने भी सोशल मीडिया पर पलटवार किया था।

क्या लिखा था सोशल मीडिया पर

सीमेंट प्लांट के शिलान्यास कार्यक्रम में डॉ. केपी यादव की अनुपस्थिति को लेकर उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि आज तो नहीं दिखे बालक बुद्धि नेता। इस टिप्पणी को भी संगठन ने गंभीरता से लिया था। भोपाल भाजपा जिलाध्यक्ष रवींद्र यती ने कृष्णा घाडगे को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब तलब किया है।

खास बातें

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के केपी यादव ने तब कांग्रेस के उम्मीदवार रहते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया को हरा दिया था। इसके बाद सिंधिया भाजपा में आ गए थे और कमलनाथ सरकार गिर गई थी। सिंधिया भाजपा में आए तो उन्हें गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ाना था, क्योंकि यह सीट सिंधिया घराने की पारंपरिक सीट मानी जाती है। अब केपी यादव की टिकट काटकर उन्हें बाद में 'सम्मान' का वादा किया गया था। जिसे बीजेपी ने मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाकर निभाया।