Hajj Yatra: हज यात्रा 2025 के लिए राज्यों का कोटा तय होने के बाद हज यात्रा शुरू हो गई है। हज यात्रा पर जाने पर कितना खर्च आता है। ..
Hajj Yatra: हज यात्रा 2025 के लिए राज्यों का कोटा तय होने के बाद हज यात्रा शुरू हो गई है। भोपाल से भी बड़ी संख्या में मंगलवार को हज यात्री रवाना हुए। हज यात्रा पर जाने पर कितना खर्च आता है। कौन लोग हज यात्रा पर जा सकते हैं, इन तमाम सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़ें ये खबर...>
सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में हज यात्रा के लिए पहले रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। यह रजिस्ट्रेशन राज्य की हज कमेटी करती है। हज बैतुल्लाह के लिए आवेदन करते समय पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, कोरोना वैक्सीन की दो खुराक का सर्टिफिकेट एक ग्रुप लीडर के बैंक खाते का कैंसिल चैक देना होता है। हज जाने के लिए मुस्लिम होना जरूरी है। महिलाओं के शरिया महराम को लेकर भी कुछ नियम हैं। फ्लाइट से जुड़े कुछ नियमों को भी पूरा करना पड़ता है।
पूरी हज यात्रा में 40 दिन लगते हैं, इसमें 10 दिन मदीना में रहना पड़ता है। यात्रा के 5 दिन प्रमुख होते हैं। इस दौरान अलग-अलग दिन अलग-अलग परंपराओं का पालन करना पड़ता है। हज यात्रा पर औसतन 3 से 3.50 लाख रुपए के करीब खर्च आता है। प्राइवेट हजयात्रा पर करीब 5 लाख रुपए का खर्च आता है। हज यात्रा के लिए दो किस्तों में रुपये जमा कराना होते है। अंतिम व तीसरी किस्त की राशि के बारे में हज कमेटी ऑफ इंडिया की ओर से बाद में जानकारी दी जाती है। वर्ष 2023 में हज यात्रा पर एक हाजी का लगभग 3.60 लाख रुपये का खर्च आया था।
कई हज यात्री सउदी करंसी रियाल लेकर रवाना होते हैं, इसके एक्सचेंज के लिए हज कमेटी समेत कई बैंकों में विशेष काउंटर बनाए गए हैं। एक रियाल की वर्तमान कीमत 22 रुपए 80 पैसे हैं। हज यात्री दो तरह से हज जाते हैं। हज कमेटी की मदद से और प्राइवेट टूर के जरिए। हज पॉलिसी के तहत सरकार कुछ मदद मुहैया करवाती है। बैग, सूटकेस, छाता आदि सामान के लिए अब कोई शुल्क नहीं देना पड़ता।
हज के मुकद्दस सफर पर मध्यप्रदेश से 8 हजार 500 से अधिक लोग जा रहे हैं। इनका चुनाव मुंबई स्थित सेंट्रल हज कमेटी ने रेन्डमाइज डिजिटल प्रक्रिया से कुर्रा के जरिए हुआ। चयनित उम्मीदवारों को मैसेज के जरिए सूचना भेजी गई थी। बताया गया कि मध्यप्रदेश से 10000 से अधिक लोगों ने हजयात्रा के लिए आवेदन किए थे। यह प्रक्रिया उन प्रदेशों के लिए हुई जहां हज आवेदनों की संख्या तय कोटा से अधिक थी।