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हाथ की ये रेखाएं रोक देती हैं शनि का दुष्प्रभाव! बनी रहती है हनुमानजी की कृपा

हाथ की रेखाएं हनुमानजी का हमारे उपर आशीर्वाद...

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get blessings of shri hanumanji

हाथ की ये रेखाएं रोक देती हैं शनि का दुष्प्रभाव! बनी रहती है हनुमानजी की कृपा

भोपाल। आज शनिवार का दिन है और शनि ऐसा ग्रह है जिसके बारे में सुनते ही अच्छे से अच्छे व्यक्ति के चेहरे पर भय का भाव पैदा हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं शनि के दुष्प्रभावों को हमारे ही हाथों में बने कुछ योग पूरी तरह से रोक सकते हैं।

ऐसे ही हाथ की रेखाएं हनुमानजी के हमारे उपर आशीर्वाद को भी दर्शाती हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में हम इन्हें समझ ही नहीं पाते। तो आइये जानते हैं हथेली की रेखाओं से जुड़े कुछ खास रहस्यों के बारे में...

जानकारों के अनुसार हाथ की रेखाओं में कई गुढ़ रहस्य छिपे होते हैं। जिनसे न केवल भविष्य से जुड़ी कई जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं, बल्कि कौन सा ग्रह आप पर कृपालु है, इस संबंध में भी बताया जा सकता है।

इस मामले में हस्तरेखाओं के जानकार वी शास्त्री बताते हैं कि हाथ की रेखाओं का विश्‍लेषण करते समय रेखाओं की दिशा ओर उससे जुड़ी अन्य रेखाओं के साथ ही हथेली पर ग्रहों के पर्वत व मणिबंध से रेखाओं का जुड़ाव देखना बहुत खास होता है।

उनके अनुसार व्यक्ति की प्रसिद्धि से लेकर आयु,भाग्य, विवाह, बच्चों के अलावा वैवाहिक जीवन, भविष्य सहित ग्रहों की आप पर नाराजगी या शुभता तक के बारे में आसानी से पता किया जा सकता है।

मंगल और शनि...
शास्त्री के अनुसार रेखाओं का विश्‍लेषण करते वक्‍त मंग्रल ग्रह और शनि का जिक्र न हो तो ऐसा संभव नहीं है। हनुमान जी को मंगल का ही दूसरा स्‍वरूप माना जाता है।

ऐसे में यदि किसी व्‍यक्ति के हाथ में मंगल का चिह्न यानि हनुमानजी का चिह्न हो तो शन‍ि की साढ़ेसाती और ढैय्या तक उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाती…

ये रेखाएं हाथ में होती हैं खास....
- जीवन रेखा के साथ मंगल रेखा: यदि किसी व्‍यक्ति के हाथ में जीवन रेखा के साथ मंगल रेखा एक से अधिक यानि पहली बड़ी, दूसरी छोटी, तीसरी उससे भी छोटी हो तो यह हनुमान रेखा या मंगल रेखा कहलाती है। यदि मंगल ग्रह उठा हुआ हो तो व्‍यक्ति के हाथ में हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्‍त होती है।


- मुड़ी न हो शनि की उंगली : द्वितीय मंगल पर यदि मस्तिष्‍क रेखा दो भाग में बंटी हो, मंगल उठा हुआ हो, वहां रेखाओं का जाल न हो, हाथ भारी हो, उंगलियां सीधी हों, खासकर शनि की उंगली मुड़ी या तिरछी न हो और न गुरु या सूर्य ग्रह पर झुकी हो तो व्‍यक्ति पर शनि की महादशा सा फिर साढ़ेसाती का कुप्रभाव नहीं पड़ता।

- मंगल पर्वत पर निशान : जीवन रेखा के साथ मंगल रेखा साफसुथरी हो, उसे राहु रेखा ने काटती हो और मंगल पर्वत पर शंख का चिह्न हो तो ऐसे व्‍यक्ति पर हनुमानजी की विशेष कृपा बनी रहती है।


- हृदय रेखा : अगर शनि ग्रह के नीचे हृदय रेखा स्‍पष्‍ट और उस पर कमल या फिर त्रिभुज स्‍पष्‍ट रूप से दिखाई देता हो तो जातक हनुमानजी का उपासक होता है। इस स्थिति में शनि भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाता।


- हृदय रेखा के ऊपर ये रेखाएं : यदि किसी व्‍यक्ति के हाथ में हृदय रेखा के ऊपर 3 सीधी रेखाएं बनती हों और शनि की उंगली सीधी हो ओर आधार बराबर हो और मंगल ग्रह दोनों हाथों में उभार लिए हुए हो तो ऐसे जातक हनुमानजी की विशेष कृपा के पात्र होते हैं।

कहते हैं कि ऐसी रेखाएं हनुमानजी के परभक्‍तों के ही हाथ में होती हैं। ऐसे भक्‍त जो कभी हनुमानजी का मंदिर बनाने में भी योगदान दे चुके हों।


- भाग्‍य रेखा और मणिबंध : भाग्‍य रेखा शनि ग्रह से निकलकर मणिबंध तक जाए और शनि ग्रह के नीचे त्रिशूल या बन जाए तो इसे हनुमान जी का चिह्न माना जाता है। इस चिह्न वाले जातक पर हनुमानजी की विशेष कृपा रहती है।

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