
Hindu Terror author RVS Mani
हरीश दिवेकर, भोपाल. देश में कोई हिंदू आतंक नहीं है। हिंदू आतंक के नाम पर सरकारी संसाधनों का उपयोग करके असली आतंकवादियों को बचाया जा रहा है। यह बात भोपाल में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने कही।
पत्रिका के साथ बातचीत में मणि ने कहा कि मैंने पहले भी यह कहा था और आज भी कह रहा हूं कि हिंदू आतंक पर कोई आधिकारिक जानकारी आज तक नहीं है। मैंने इस विषय पर एक किताब भी लिखी है कि कैसे दिग्विजय सिंह ने हिंदू आतंक की नींव रखी और उसे फैलाया।
आरवीएस मणि ने कहा कि यूपीए की सरकार में इशरत को आतंकी न बताने का दबाव था। इसके लिए एसआइटी चीफ ने मुझे सिगरेट से भी दागा था। मणि के अनुसार सीबीआई अफसरों ने मुझे भी परेशान किया था। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफिडेविट को मुझसे बदलवाया गया।
तत्कालीन यूपीए सरकार ने इशरत जहां एनकाउंटर मामले में गुजरात के पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा और एनके आमिन पर फर्जी एनकाउंटर का केस बनाकर जेल में बंद किया था। अब दो दिन पहले ही सीबीआइ कोर्ट ने इशरत जहां एनकाउंटर केस में गुजरात के पूर्व पुलिस अधिकारी वंजारा और आमिन को क्लीनचिट दे दी।
भगवा आतंक के नाम पर प्रज्ञा ठाकुर को फंसाया
मणि ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर को ‘भगवा आतंक’ के नाम पर फंसाया गया। उन पर मकोका लगाकर जेल में बंद कर प्रताडि़त किया। इधर, समझौता एक्सप्रेस विस्फोट का आरोपी आरिफ कस्मानी बच निकला, मक्का मस्जिद विस्फोट के मामले में बिलाल बच निकला। एक सवाल के जवाब में मणि ने कहा कि मैं यहां न तो भाजपा का प्रचार करने आया हूं न ही प्रज्ञा ठाकुर का।
मेरे पब्लिशर ने भोपाल में मेरी पुस्तक ‘हिंदू टेरर’ बुद्धिजीवियों के साथ संवाद कार्यक्रम रखा था, उसी में शामिल होने आया हूं। एक सवाल के जवाब में मणि कहते हैं कि मेरी पुस्तक मैंने अगर कुछ गलत लिखा है, तो अब तक किसी ने इसे कोर्ट में चुनौती क्यों नहीं दी।
पुस्तक में लिखा-‘मुझसे बार-बार पूछा कितने हमलों में हिन्दुओं का हाथ है’
आ रवीएस मणि की पुस्तक ‘हिंदू टेरर’ में बताया गया है कि नागपुर में आरएसएस मुख्यालय में 2006 बम विस्फोट के बाद तत्कालीन गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने आतंरिक सुरक्षा के अफसरों को तलब किया। उस समय गृह विभाग के सभी बड़े अफसर विदेश में होने के कारण मुझे जाना पड़ा।
तत्कालीन मंत्री पाटिल के साथ दिग्विजय सिंह और हेमंत करकरे बैठे हुए थे। मणि लिखते हैं कि हेमंत करकरे और दिग्विजय सिंह ने उनसे विस्फोट के बारे में कई सवाल पूछे। मैंने उन्हें बताया कि एक विशेष समुदाय ने यह विस्फोट किए हैं, तो वे मेरे जवाब से खुश नहीं दिखे। उनकी बातचीत में नांदेड़, बजरंग दल के बार-बार संदर्भ थे। उन्होंने पूछा कि कितनी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें हिन्दुओं का हाथ है।
मैंने कहा कि नांदेड़ विस्फोट का पहला मामला था, जिसमें ’हिंदू आतंक’ शब्द का पहली बार इस्तेमाल किया गया था। लेकिन जांच के बाद वह मामला भी खारिज हो गया। मणि कहते हैं कि इसके बाद से ही समाचार पत्रों में हिन्दू और भगवा आतंकवाद के समाचार आने शुरू हो गए थे। 2008 में हुए मालेगांव बम विस्फोट में अहले-ए-हदीथ/हदीस शामिल थे, इसका सबूत होने के बाद भी उसे एक साइड कर दिया गया था और इस नैरेटिव को पूरी तरह से बदल दिया गया था।
Published on:
05 May 2019 08:45 am

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