
25 साल में 768 लड़कियों को बालिका वधू बनने से बचाया, 26 हजार बच्चों की मदद की, कई भटकी लड़कियों को परिवार से जाेड़ा
भोपाल. 25 साल के इतिहास में 768 नाबालिग लड़कियों को बालिका वधू बनने से बचाया। 26 हजार 734 बच्चों जिसमें माइनर से लेकर बड़ी लड़कियां तक शामिल हैं, इनको कहीं न कहीं बाहर के लोगों या कुछ केस में परिवार तो कुछ मामलों में राह भटकने से बचाने वाला चाइल्डलाइन 1 सितंबर से महिला बाल विकास में मर्ज हो गया। पच्चीस साल के सफर में चाइल्डलाइन के कर्ताधर्ताओं के पास कई ऐसे केस आए जिसमें लगा बच्चा या बच्ची अब परिजनों के हाथ से निकल जाएंगे। कोई नशे की दलदल में फंस गया, तो कोई अपनों से परेशान है। कहीं कोई बच्चे भाग गए, मिले तो घर नहीं जाना चाहते। ऐसी सैकड़ों यादें चाइल्ड लाइन के पास हैं। सबसे बड़ा काम ये रहा कि 768 नाबालिगों को बालिका वधू बनने से बचाया। इसमें कई ऐसे केस हैं, जिनमें चाइल्डलाइन, महिला बाल विकास और पुलिस की टीम को आज भी याद हैं। कई बालिका वधू बनने से बची बच्चियाें ने बाद मेें जिम्मेदारों से संपर्क साध कर धन्यवाद भी दिया। श्यामला हिल्स थाने से ये संचालित होता था।
ऐसे केस भी आए- टीम के पहुंचते ही दूल्हे की हल्दी धोने में लग गए
करीब चार साल पहले बैरसिया में एक बाल विवाह की सूचना टीम को मिली, जब संयुक्त टीम गांव तक पहुंची तो इसकी सूचना परिजनों तक पहुंच गई। उन्होंने आनन फानन में दूल्हे की हल्दी छुड़ाने के लिए बाल्टी भर भर कर दूल्हे पर पानी डालना शुरू कर दिया। घर की सजावट मिटा दी गई, इसके बाद भी कुछ निशान घर पर रह गए। टीम ने आधार कार्ड की मदद से दूल्हे को नाबालिग पाया और जहां से बारात आ रही थी उसे रुकवा दिया।
- 15 साल की लड़की अपनी शादी के लिए अड़ गईदो साल पहले कोटरा सुल्तानाबाद में एक नाबालिक जोड़े की शादी की शिकायत पर टीम पहुंची तो लड़की 15 साल की निकली। लेकिन यहां उल्टी लड़की टीम से भिड़ गई। बोली मैं तुमको कहां से 15 साल की लगती हूं, मुझे तो शादी करनी है। इस केस की समझाइश के लिए पुलिस तक को लडकी को डराना पड़ा। तब कहीं जाकर वह शादी नहीं करने पर राजी हुई और लिखकर दिया कि जब तक वह बालिग नहीं हो जाती, शादी नहीं करेगी।
कोरोना के दौरान 56 शादियां रुकवाई
सबसे ज्यादा केस कोरोना के दौरान सामने आए। चाइल्डलाइन के रिकॉर्ड में इस दौरान 56 बाल विवाह रुकवाए गए। जो इतने कम समय में सबसे ज्यादा संख्या थी। आम तौर पर अक्षय त्रतिया के अवसर पर एक साथ दस-दस टीमें बनाकर बालिका वधू बनने से रोका गया।
काउंसलिंग के बाद बनी डॉक्टर16 साल की लड़की ने 21 साल के लड़के से फेसबुक पर दोस्ती कर ली। दोनों मिलने लगे, इसी बीच उनके संबंध भी बन गए। लड़के ने किसी तरह उसके फोटो खींच लिए। लड़की को ये बात पता चली तो वह घर से भाग गई। लड़की के पिता वकील थे और काफी गुस्सैल भी थे। लड़की को बरामद कर लिया, लेकिन वह घर जाने को तैयार नहीं हुई। इस पर चाइल्डलाइन की टीम ने उसके पिता को समझाया तक जाकर लड़की घर गई। आज ये लड़की डॉक्टर बनकर अच्छा जीवन जी रही है। ऐसे एक नहीं कई केस हैं, जिनमें इस तरह की मिसालें भी देखने को मिली हैं।
वर्जन्
हम लोगों ने काफी केसों में बहुत अच्छा काम किया। अब तो याद भी नहीं हैं। लेकिन कोरोना के दौरान 56 बालिका वधू के केस टीम ने रुकवाए हैं। ये एक चैलेंजिंग था। एक तरफ कोरोना तो दूसरी तरफ लोगों के यहां जाकर शादियां रुकवा रहे हैं। इसमें पूरी टीम एक साथ काम करती थी।अर्चना सहाय, डायरेक्टर आरंभ संस्था
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- 18005991480- मदद के लिए अब यहां करें फोन- 26734 बच्चों की काउंसलिंग कर मदद की
- 4900 से ज्यादा मामले घर से भागने के- 600 केस अपनों से परेशान बच्चों के
- बाकी केस अन्य कैटेगिरी के हैं।
Updated on:
02 Sept 2023 10:22 pm
Published on:
02 Sept 2023 10:21 pm

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