भाजपा के लिए सॉफ्ट हो रहा सिंधिया का दिल, बीजेपी के खिलाफ अहम मुद्दों पर खमोशी क्यों ?

ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों कमलनाथ सरकार पर हमलावर हैं।

भोपाल. मध्यप्रदेश कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वजह हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में अपने ट्विटर एकाउंट पर अपना बायो बदला है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में एक बार फिर से अटकलों का दौर शुरू हो गया है। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्विटर पोस्ट को देखा जाए तो कहानी कुछ अलग ही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीते एक महीने में भाजपा के खिलाफ सीधा हमला नहीं बोला है, जबकि मुख्यमंत्री कमल नाथ से कई कई मांगों को लेकर वो लगातार लेटर लिख रहे हैं और इन लेटरों को अपने ट्विटर पर शेयर भी कर रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के खिलाफ हमलावर क्यों नहीं हैं।

भाजपा को लेकर क्यों सॉफ्ट हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया?
हाल के दिनों को छोड़ दिया जाए तो ज्योतिरादित्य सिंधिया खुले तौर पर भाजपा पर हमला करते थे। भाषणों में भी और सोशल मीडिया में भी। प्रदेश के साथ-साथ देश के हर मुद्दे में उन्होंने मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में अपना ट्रैक बदल दिया है। अब वो मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर होने के बजाए सॉफ्ट हो रहे हैं। 25 अक्टूबर से अभी तक सिंधिया ने कई पोस्ट किए लेकिन उन्होंने सीधे मोदी सरकार पर कोई भी हमला नहीं किया है। जानकारों का कहना है कि इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं।

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  1. ज्योतिरादित्य सिंधिया के कद को लेकर मध्यप्रदेश में सियासत गर्म है। ऐसा कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार कांग्रेस में सिंधिया का कद कम हो रहा है। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के खिलाफ हमलावर ना होकर भविष्य के लिए भाजपा से अपना संबंध अच्छा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। क्यों कई बार ऐसी भी अटकलें लगाई गईं की ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने इन खबरों का खंडन किया था लेकिन भाजपा के खिलाफ पर हार्ड होने की जगह सॉफ्ट होने की एक वजह यह है कि सिंधिया भविष्य के रास्ते बंद नहीं करना चाहते हैं।
  2. शिवपुरी जिले के पोहरी विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक ने हाल ही में कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया वो नेता हैं जो कभी भी मध्यप्रदेश में पार्टी बना सकते हैं। अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया कोई नई पार्टी बनाते हैं तो वो सीधे तौर पर कांग्रेस से बगावत होगी। कांग्रेस से बगावत के बाद सिंधिया भाजपा का सहारा ले सकते हैं। क्योंकि सिंधिया दोनों तरफ से विरोध नहीं चाहते हैं। सिंधिया अगर भाजपा पर हमलावर रहते हैं और कांग्रेस से बगावत करते हैं तो ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सिंधिया के खिलाफ हमलावर हो जाएंगे। ऐसे में सिंधिया के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं इसलिए सिंधिया अपनी सरकार से सवाल कर रहे हैं तो भाजपा के खिलाफ खामोश हैं।
  3. ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयाराजे सिंधिया खुद भाजपा की संस्थापक सदस्य रही हैं। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया अगर कांग्रेस से बगावत कर कोई नई पार्टी बनाते हैं तो उन्हें भाजपा का साथ भी मिल सकता है। लिहाजा इसी कारण से सिंधिया भाजपा पर हमलावर नहीं हैं।

अहम मुद्दों पर खामोशी
भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लोकसभा में महात्मा गांधी के हत्यारे को देशभक्त बताया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस अहम मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं धी। वहीं, महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने केवल एक ट्वीट किया उन्होंने भाजपा पर हमलावर होने के जगह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया और संविधान दिवस की बधाई दी। वहीं, प्रदेश के मुद्दों की बात करें तो सिंधिया हर छोटे बड़े मसले पर अपनी राय रखते हैं। गुना-शिवपुरी से जुड़ी खबरों को भी ट्वीट और रिट्वीट करते हैं। लेकिन केन्द्र के कई अहम मुद्दों पर वो खमोश हैं।

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कांग्रेस से कई सवाल
ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के खिलाफ कई बार हमला बोल चुके हैं। ज्योतिरादित्य ने अब अपना ट्रैक बदला है। सिंधिया अब सरकार के खिलाफ खुला हमला ना बोलते हुए विकास कार्यों को लेकर लेटर लिख रहे हैं। सिंधिया से भी बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वो मध्यप्रदेश के विकास कार्यों को लेकर प्रतिबद्ध हैं और अप्रत्यक्ष रूप से सरकार को कटघरे में भी खड़ा कर रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया बीते एक महीने में करीब 4 लेटर कमल नाथ को दो लेटर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी को एक लेटर लिख चुके हैं। इन लेटरों के माध्यम से सिंधिया प्रदेश की जनता और कार्यकर्ताओं को लगातार ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि मैं मध्यप्रदेश के विकास कार्यों के लिए कितना प्रतिबद्ध हूं। वहीं, जानकारों का कहना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिखे लेटरों पर अगर सरकार कार्रवाई करती हैं तो इसका श्रेय भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास ही जाएगा।

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धारा 370 का समर्थन किया था
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी लाइन से हटकर जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35 A हटाए जाने का समर्थन किया था। इससके साथ-साथी अयोध्या मुद्दे पर भी उन्होंने यही कहा था कि अब देश में राम की नहीं विकास की बात होगी।

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Pawan Tiwari Producer
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