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देखरेख के अभाव में बदहाल होता जा रहा कमला नेहरू पार्क

15 एकड़ क्षेत्र में फैले पार्क और यहां आने वालों की सुरक्षा के लिए मात्र दो चौकीदार

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देखरेख के अभाव में बदहाल होता जा रहा कमला नेहरू पार्क

देखरेख के अभाव में बदहाल होता जा रहा कमला नेहरू पार्क

भोपाल. 15 एकड़ क्षेत्र में फैला बीएचईएल का कमला नेहरू पार्क देख-रेख के अभाव में बदहाल होता जा रहा है। पार्क में उग आई बड़ी-बड़ी घास में निकलने वाले जहरीले जीव जंतुओं के कारण लोगों को दुर्घटनाओं का डर बना रहता है। इस पार्क में रोजाना हजारों की संख्या में सैलानी परिवार सहित भ्रमण करने और सुकून के कुछ पल बिताने आते हैं।

इसके बाद भी यहां सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें डर बना रहता है। पार्क में सुरक्षा के नाम पर दिन में मात्र दो गार्ड रहते हैं। इस सीजन में हुई जोरदार बारिश के कारण पार्क का सरोबर लबालब भरा हुआ है। यहां आने वाले बच्चे कई बार पानी में उतर जाते हैं, जिन्हें रोकने वाला कोई नहीं होता।

ऐसे में इनके डूबने की आशंका बनी रहती है, इसके बाद भी यहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पार्क की देखरेख करने वाले कर्मचारियों के नहीं होने से पार्क उजाड़ होता जा रहा है। पेड़ों की छंटाई का काम भी नहीं हो रहा है।

बच्चे करते हैं हाथी की सवारी
परिवार के साथ आने वाले बच्चे इस पार्क के बीचो-बीच बनाई गई हाथी की सवारी का लुत्फ उठाते हैं। बड़ी संख्या में यहां बच्चे हाथी की प्रतिमा में फिसल पट्टी मे फिसलने के साथ मस्ती करते रहते हैं। माता-पिता भी खुशी-खुशी उन्हें बार-बार हाथी की पीठ पर बैठाते हैं और फिर नीचे आकर उन्हें फिसलता देख खुश होते हैं।

झूला जोन में पहुंचते हैं बच्चे
कमला नेहरू बाल उद्यान पार्क में परिवार के साथ आने वाले बच्चों के बीचो-बीच दो हिस्सों में बच्चों के लिए झूला जोन बनाया गया है। जहां रोजाना बड़ी संख्या में बच्चे पहुंचकर झूलों को आनंद लेते हैं। परिवार के लोग भी बच्चों को झूला जोन में छोड़कर दो पल सुकून के साथ बैठते हैं। बीती गर्मी में इन झूलों का रंग-रोंगन करके सजाया संवारा गया था। परिवार के साथ पार्क में आने वाले बच्चे यहां घंटों मौज मस्ती करते रहते हैं।

बच्चे नहीं कर पा रहे टे्रन की सवारी
पार्क में चलने वाली ट्वाय ट्रेन लम्बे समय से बंद पड़ी है, जिससे इस पार्क में ट्रेन चढऩे की उम्मीद लिए आने वाले बच्चों को निराशा ही हाथ लगती है। बच्चों के साथ आने वाले परिजन भी बच्चों को ट्रेन के बजाय झूले सहित अन्य जगहों पर घुमाकर उन्हें बहलाते रहते हैं। यूं तो इस पार्क में रोजाना हजारों की संख्या में लोग परिवार सहित घूमने फिरने आते हैं, लेकिन रविवार या फिर अवकाश के दिन यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या और बढ़ जाती है।