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इन बेटियों को सुविधाओं का अभाव, जूते फटे, लेकिन हौसले बुलंद, खेल में छू रही आसमां

गुदड़ी के लाल कर रहे कमाल, खेलो एमपी यूथ गेम्स में गांवों के खिलाड़ी दिखा रहे अपनी प्रतिभा

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भोपाल। राज्यस्तरीय खेलो एमपी-2023 में मुकाबले भोपाल, रीवा, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, कटनी और शिवपुरी में खेले जा रहे हैं। भोपाल में वॉलीबाल, फुटबाल, कुश्ती, बॉक्सिंग, फेंसिंग, जूडो, ताईक्वांडो, टेनिस, कयाकिंग-कैनोइंग, रोइंग और तैराकी की प्रतियोगिताएं हो रही हैं। इसमें प्रदेश के छोटे-छोटे गांवों के खिलाड़ी भी प्रतिभा का जलवा दिखा रहे हैं। उनके सामने कई तरह की परेशानी है, पर गुदड़ी के ये लाल अपने कमाल के खेल में सभी को अचंभित कर रहे हैं।

फटे जूते, पर हौसला आसमान में

शहडोल के छपरा गांव की सपना गुप्ता एक साल से फुटबॉल खेल रही हैं। वे कहती हैं, पिता हैं नहीं। मां छोटे-मोटे काम कर परिवार चलाती हैं। सपना गांव में दूसरों को खेलते देख मां से फुटबॉल खेलने की जिद की। मां ने पहले मना किया, पर जिद के आगे हार गईं। खेलने के लिए जो जूते थे, वे भी फट गए। लेकिन ये एक माह तो ओर चल जाएंगे। नए खरीदने के पैसे नहीं थे। मैं सुब्रतो कप अंडर-17 के साथ अंडर-19 में खेल चुकी हूं।

पिता ने उधार लेकर जूते खरीदे

शहडोल के विचारपुर की सान्या कंडे महज 13 साल की है। वह चार साल से फुटबॉल खेल रही हैं। सान्या कहती हैं, पिता डीजी बजाते हैं। एक जोड़ी जूते फट गए, पापा ने उधार लेकर नए दिलवाए। हालांकि ये स्पोट्र्स शूज नहीं हैं। मैं इन्हें बाहर भी पहन पाऊं इसलिए ये जूते ले लिए। डाइट के लिए ज्यादा पैसे नहीं होते, सिर्फ चने ही खा पाती हूं।

बेटी का सपना पूरा करने पिता ने छोड़ी आर्मी

मुरैना के रजूकापुरा गांव से आई दीप्ति तोमर वॉलीबॉल खिलाड़ी हैं। 10वीं की छात्रा दीप्ति खेलो इंडिया, एक जूनियर नेशनल व दो स्टेट खेल चुकी हैं। उसने वॉलीबॉल खेलने की बात मां को बताई तो मना कर दिया। आर्मी में तैनात पिता जैसे-जैसे माने। बेटी का खेल देखा तो उन्होंने नौकरी छोड़ दी। पोरसा में अन्य लड़कियों को भी यह खेल सिखाना शुरू कर दिया। मुरैना के भिखारीपुरा राजौदा की तनु तोमर एक नेशनल और दो स्टेट खेल चुकी हैं। तनु बताती हैं, सुबह-5 बजे उठकर प्रैक्टिस के लिए जाती हूं। कभी साइकिल तो कभी ऑटो तो कभी लिफ्ट लेकर मैदान पहुंचती हूं। यहां से स्कूल और फिर शाम को मैदान में। रात-9 बजे घर पहुंचती हूं।