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हजयात्रा 2026: पहली बार… हजयात्रियों की कलाई पर जीपीएस, डिजिटल कोड, बिछड़े तो मिलना आसान, हाईटेक हजयात्रा

भोपाल

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Shakeel Khan

Feb 08, 2026

hajyatra hitech

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भोपाल. मक्का-मदीना में लाखों हजयात्रियों के बीच अब प्रदेश से जाने वालों की पहचान आसान होगी। यह आसानी से मालूम किया जा सकेगा कि वे किस स्थान पर हैं; उनकी लाइव लोकेशन ट्रैक की जाएगी। हर यात्री की कलाई पर GPS बांधा जाएगा, जो एक स्मार्ट वॉच के रूप में होगा।
​हज यात्रा को हाईटेक बनाते हुए सेंट्रल हज कमेटी यह प्रयोग करने जा रही है। प्रदेश से साढ़े सात हजार लोग हज यात्रा पर रवाना होंगे, जबकि देशभर से इनकी संख्या डेढ़ लाख होगी। प्रत्येक यात्री इस बार GPS से जुड़ा होगा। इसके लिए स्मार्ट वॉच दी जा रही है, जिसमें हर यात्री का एक यूनिक नंबर होगा। इसमें एक पैनिक बटन भी होगा; इसे प्रेस करने पर दल प्रमुख सहित मुख्यालय को तुरंत सूचना पहुंचेगी, जिससे संपर्क करना आसान होगा।

​40 दिन का सफर, लाखों जायरीन

हज सफर चालीस दिन का होता है, जिसमें लगभग तीस से चालीस लाख लोग शामिल होते हैं। इतनी भीड़ में परिवार के सदस्यों के बिछड़ने के मामले अक्सर सामने आते हैं। अभी मैन्युअल आईडी होने के कारण बिछड़े हुए लोगों को खोजने में तीन से चार दिन तक लग जाते हैं। इनकी संख्या हर साल सैकड़ों में होती है। दो साल पहले एक हादसे के दौरान पहचान करने में सबसे ज्यादा दिक्कत आई थी।

​18 अप्रैल से हजयात्रा के लिए उड़ान

हज यात्रा पर प्रदेश से 7.5 हजार लोग रवाना होंगे। अप्रैल से हज उड़ानों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। स्टेट हज ट्रेनर मुफ्ती फय्याज ने बताया कि यह स्मार्ट वॉच 'हज ऐप' से जुड़ी होगी। यह ऐप सेंट्रल हज कमेटी द्वारा संचालित है।

हजयात्रियों को इस बार स्मार्ट वॉच दी जा रही है। इसके सहारे हर यात्री का स्पेशल डिजिटल कोड होगा। पहचान आसान होगी। लोकेशन मिल सकेगी। लाखों हजयात्रियों के बीच बिछड़े तो मिलना आसान हो जाएगा।

मोहम्मद तौफीक, आल इंडिया हज वेलफेयर सोसायटी