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मास्टर प्लान की उड़ रही धज्जियां, ग्रीन बेल्ट में लैंड यूज बदलकर लील रहे हरियाली

green beltशाहपुरा, बड़ा तालाब, चूनाभट्टी, टीटी नगर, शिवाजी नगर में बिगड़ा पर्यावरण संतुलनमास्टर प्लान और स्पष्ट नियमावली की अनुपस्थिति से नुकसान

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भोपाल। क्लीन और ग्रीन भोपाल के लिए बातें बहुत हो रही हैं, लेकिन वास्तव में हरियाली बचाने वाला मास्टर प्लान का नया मसौदा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सरकार से राय मांगने के नाम पर जिला सुनवाई समिति ने इस मामले से लगभग किनारा कर लिया है। नया मास्टर प्लान और स्पष्ट नियम नहीं होने से वर्ष 2005 के मसौदे को आधार मानकर सरकारी-गैर सरकारी डेवलपमेंट शहर की हरियाली को तेजी से लील रहा है। शहर में प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी लैंड यूज बदल कर ग्रीन बेल्ट के लिए आरक्षित स्थानों पर पक्के निर्माण कर लिए गए हैं। यहां खास बात ये है कि इन निर्माणों के लिए नियमों के साथ खिलवाड़ करने में सरकारी एजेंसियां सबसे आगे हैं। जिसके लिए पेड़ों का खुलेआम कत्लोआम किया जा रहा है।

पुराने मसौदे में बड़े तालाब का ग्रीन बेल्ट एरिया 50 मीटर, शाहपुरा तालाब 30 मीटर, कलियासोत नदी 33 मीटर घोषित है। इसके अलावा शिवाजी नगर, तुलसी नगर, टीटी नगर सहित राजधानी परियोजना प्रशासन के कुल प्लानिंग एरिया में 30 से 50 प्रतिशत तक भूमि को हरित क्षेत्र के तौर पर संरक्षित करने की प्रत्याशा तय है, यानी निर्माण अनुमतियां नियमों का पालन होने की उम्मीद में जारी की जाएंगी।

बात करें मौजूदा हालात की तो कलियासोत नदी नक्शे से गायब हो चुकी है। खानूगांव, चूनाभट्टी, प्रशासन अकदमी, एप्को परिसर जैसे निर्माण बडे़ तालाब और शाहपुरा के कैचमेंट एरिया में बने हैं। स्मार्ट सिटी बसाने के नाम पर पहले शिवाजी नगर और अब टीटी नगर को उजाडऩे की तैयारी है। हालांकि टीटी नगर की 332 एकड़ जमीन में केवल 30 फीसदी में कंस्ट्रक्शन करने का दावा किया गया है।

यहां बदला लैंड यूज

बड़ा तालाब- तालाब के फुल टैंक लेवल 1666.80 फीट से 50 मीटर दूर तक कैचमेंट एरिया ग्रीन बेल्ट घोषित है। इसके बावजूद वन विहार, बोट क्लब, खानूगांव, बैरागढ़ क्षेत्र में पक्के कंस्ट्रक्शन सरकारी अनुमतियों के साथ हो चुके हैं।

शाहपुरा तालाब- वर्ष 2005 के मसौदे की कंडिका क्रमांक 4.47 में शाहपुरा तालाब के 30 मीटर कैचमेंट एरिया को ग्रीन बेल्ट कहा गया है। अतिक्रमणों के चलते 8.29 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैला ये तालाब वर्तमान में 5.75 वर्ग किलोमीटर एरिया में सिकुड़कर रह गया है।

चूनाभट्टी- तटीय इलाके में आमोद प्रमोद के नाम पर अस्थाई निर्माण की अनुमतियां वैध हैं लेकिन इनकी आड़ में पक्के निर्माण हो रहे हैं। हुजूर तहसीलदार ने एनजीटी में 20 अप्रैल 2016 को रिपोर्ट देकर चूनाभट्टी श्रेयांस-परिता हाउसिंग सोसायटी के कई मकान 33 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में बने होने की सूचना दी थी।

नया भोपाल- अरेरा हिल्स, शिवाजी नगर, तुलसी नगर, अरेरा कॉलोनी, टीटी नगर सीपीए के प्लानिंग एरिया में आने के बावजूद तेजी से हरियाली विहीन हो रहे हैं। शौर्य स्मारक, बीआरटीएस के नाम पर अब तक हजारों पेड़ कट चुके हैं। ३३२ एकड़ में बनने वाली स्मार्ट सिटी के लिए फिर हजारों कटने की कगार पर हैं।

हरियाली बचाने वाले नियमों को लागू करने की बजाए इसे बायपास करने के तरीके विकसित किए जा रहे हैं, ये गलत है। नया ड्राफ्ट समय पर नहीं आया तो अगले १० से १५ साल में तालाब और हरियाली पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे।
- सुभाष सी पांडे, पर्यावरणविद

कॉलोनियों के लेआउट सेंक्शन करते वक्त ग्रीन एरिया छोडऩे का स्पष्ट प्रावधान है। अतिक्रमण या नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में नगर निगम, जिला प्रशासन जैसे विभाग कार्रवाई के लिए अधिकृत किए गए हैं।
- एसके मुद्गल, संयुक्त संचालक, टीएनसीपी

रिपोर्ट - हर्ष पचौरी