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मध्य प्रदेश में भाजपा का राजतिलक, सबसे ज्यादा वोट शेयर का रिकॉर्ड, कांग्रेस पर भारी पड़ गई ये एक गलती

एमपी में भाजपा ने उन मुद्दों को भी नहीं छोड़ा, जिन पर भाजपा देशभर में प्रचार अभियान छेड़ चुकी थी। वहीं, कांग्रेस रणनीतिक तौर पर बेहद कमजोर साबित हुई।

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एमपी में बीजेपी की रिकॉर्ड जीत के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव.

विजय चौधरी. भाजपा ने 'मौके को झपट लिया' और कांग्रेस 'मौका चूक गई।' यही हुआ है, मध्यप्रदेश में। लगातार तीसरी बार केंद्र में मोदी सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा जुटाने में मंगलवार का दिन खास रहा। प्रदेश ने भाजपा को 29 सीटें देकर मंगल टीका लगाया। भाजपा ने 29/0 से नई लाइन खींच दी। आक्रामक रणनीति से यह सफलता हासिल की है। चुनाव के दौरान एक- एक कर कांग्रेस के तीन विधायकों को तोडऩा और हर दिन किसी नेता को पार्टी से जोडऩे का सिलसिला आखिरी दिन तक कायम रखा।

पार्टी ने उन मुद्दों को भी नहीं छोड़ा, जिन पर भाजपा देशभर में प्रचार अभियान छेड़ चुकी थी। वहीं, कांग्रेस रणनीतिक तौर पर बेहद कमजोर साबित हुई। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के सामने सुनहरा अवसर था, दोनों आपस में ही गुत्थम-गुत्था होते रहे। पटवारी पूरे प्रदेश में प्रचार में दिखे, मगर उनकी कोशिशें हवाहवा ई ही साबित हुईं। संगठन के तौर पर जो मजबूती और मदद प्रत्याशियों को पहुंचनी थी, वह काम नहीं हुआ। ऐसा लगा मानो, ये दोनों नेता खुद का ही प्रचार कर रहे हैं, पार्टी का नहीं।

एक बड़ी चूक कांग्रेस ने यह भी की कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी जिन मुद्दों को उठा रही थी, उन्हें प्रदेश में छुआ तक नहीं गया। प्रदेश सरकार की खामियों और वादाखिलाफी के नाम पर पार्टी मैदान में थी, जो कि गलत दांव साबित हुआ। संविधान बचाने, आरक्षण खत्म करने के साथ ही कांग्रेस के घोषणापत्र में की गई पांच न्याय की बातों को प्रचार में प्रमुखता से उठाया ही नहीं गया। वहीं, भाजपा ने संगठन और सदन दोनों ही मोर्चों पर बेहतरीन तालमेल का उदाहरण पेश किया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा दोनों की अगुवाई में बगैर किसी चूक के प्रचार अभियान चला। कई सीटों पर कमजोर उम्मीदवार के बाद भी पार्टी ने कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरने नहीं दिया। मंडला, मुरैना, धार, रतलाम, भिंड, ग्वालियर जैसी सीटों को नाजुक मान विशेष कार्ययोजना बनाई और वोटों की संखया को जीत की दहलीज तक खींच लाए। इस चुनाव ने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के सियासी सफर को भी विराम लगा दिया। पहले कमलनाथ, विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद प्रदेश अध्यक्ष का पद गंवाया, नेता प्रतिपक्ष भी नहीं बने।

भाजपा में जाने के संकेत दिए, मगर जा न सके। फिर ध्यान छिंदवाड़ा पर लगाया और बेटे नकुलनाथ को सांसद बनाए रखने में जुटे। हर दिन उनकी आंखों के सामने भाजपा ने कांग्रेस में सेंध लगाई, मगर वे कुछ कर न सके। नाथ अकेले ही किला लड़ाते रहे। अपने काम की दुहाई से सहानुभूति बटोरने की कोशिशें की जो नाकामयाब रहीं और एक सामान्य कार्यकर्ता से नकुल हार गए। अब कमलनाथ का अगला कदम या होगा, यही देखना है।

क्लीन स्वीप के पांच कारण

भाजपा कैसे जीत गई 29 सीटें

1. भाजपा में संगठन और सत्ता का बेहतर तालमेल।

2. मोदी की गारंटी और प्रचार को पूरी तरह आत्मसात करना।

3. अंदरुनी तौर पर कोई कलह नहीं होना।

4. जाति-क्षेत्र के आधार पर नेताओं को तैनात करना।

5. मोहन यादव सरकार के अल्प कार्यकाल में कोई बड़ी चूक न होना।

कांग्रेस इसलिए हारी सारी सीटें

1. राहुल गांधी के भाषणों के हिस्सों को प्रचार में शामिल नहीं करना।

2. घोषणा-पत्र की गारंटी व न्याय प्रचारित नहीं की।

3. पार्टी छोड़कर जाने वालों को गंभीरता से नहीं लेना।

4. प्रदेशाध्यक्ष-नेता प्रतिपक्ष में तालमेल का अभाव।

5. कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का अपने क्षेत्रों में ही सीमित रहना।

एमपी क्लीन स्वीप वाला सबसे बड़ा राज्य

भाजपा के क्लीन स्वीप वाले राज्यों में मध्यप्रदेश (२9), नई दिल्ली (7), त्रिपुरा (2), उत्तराखंड (5), हिमाचल प्रदेश (4), अरुणाचल प्रदेश (2) और केंद्रशासित अंडमान निकोबार (1) हैं। मप्र इसमें सबसे बड़ा राज्य है। पिछले चुनाव में भाजपा ने गुजरात (29) और राजस्थान (25) में क्लीन स्वीप किया था।

जनता ने विकास के द्वार खोले

पीएम मोदी पर देशप्रदेश की जनता ने भरोसा जताया है। इसी का नतीजा है कि सभी 29 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल करने में हम कामयाब रहे। आजादी के बाद से छिंदवाड़ा के विकास में बाधा बनने वालों को जनता ने सबक सिखाते हुए विकास के द्वार खोल दिए हैं।

- डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

कार्यकर्ताओं की मेहनत का फल

मप्र में भाजपा की सभी लोकसभा सीटों पर ऐतिहासिक विजय हुई है। ये पीएम मोदी के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत से हुआ। छिंदवाड़ा को कमलनाथ का गढ़ कहते थे, लेकिन मैंने पहले ही बोला था ये केंद्र की गरीब और कल्याणकारी योजनाओं का गढ़ है।

- वीडी शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा