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एक्सीडेंट के बाद खोपड़ी में फंस गई थी शख्स की आंख, फिर भोपाल के डॉक्टरों ने कर दिखाया कमाल

AIIMS Bhopal : डॉक्टरों की मानें तो दुनियाभर में इस तरह के मामले करोड़ों में एकाद ही देखने को मिलते हैं। यानी ये बेहद रेयर केस था। साथ ही दिमाग से कनेक्टेड होने के कारण ये बेहद जटिल सर्जरी थी। लेकिन, एम्स के कई विभागों के एक्सपर्ट डॉक्टरों ने इस रिस्की सर्जरी को सफलतापूर्वक कर दिखाया।

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AIIMS Bhopal

AIIMS Bhopal :मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में स्थित जैतवारा नामक गांव का 25 साल का एक युवा बाइक एक्सीडेंट के बाद अपनी आंखों की रोशनी खो बैठा था। एक्सीडेंट में उसकी एक आंख उसकी खोपड़ी के अंदर चली गई थी। डॉक्टरों ने बताया कि ऐसा केस दुनिया में बहुत कम देखने को मिलता है।

अगस्त 2024 को हुए इस एक्सीडेंट में युवक को गंभीर चोटें आई थीं। उसकी बाईं आंख एथमॉइड साइनस (आंखों के बीच की एक छोटी हड्डी के अंदर का खोखला हिस्सा) में चली गई थी। उसे दिखाई देना बंद हो गया था। उसे सिरदर्द और नाक से पानी आने की शिकायत भी हो रही थी।

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प्राइवेट हॉस्पिटल में नहीं मिला फायदा

परिजन ने पहले युवक को एक प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां उसे भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। फिर मरीज परिजन के आग्रह पर उसे भोपाल एम्स रेफर किया गया। यहां एम्स के डॉक्टरों ने युवक की जांच की और पाया कि उसकी हालत बहुत गंभीर है।

दिमाग में हवा भरी थी

एम्स के डॉक्टरों की मानें तो युवक के दिमाग में हवा भर गई थी, जिसे मेडिकल भाषा में पन्यूमोसिफेलस कहते हैं। उसकी बाईं आंख एथमॉइड साइनस में फंसी हुई थी।

दुर्लभ सर्जरी की तैयारी

डॉक्टरों ने बताया कि पूरी दुनिया में इस तरह के केस बहुत कम देखने को मिलते हैं। ये एक बहुत ही जटिल और रिस्की सर्जरी थी, जिसके लिए कई विभागों के डॉक्टरों को एक साथ आना पड़ा।

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इन डॉक्टरों ने की सफल सर्जरी

डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. भावना शर्मा, डॉ. बी एल सोनी और डॉ. वैशाली वेंडेसकर की टीम ने सबसे पहले युवक की नसों को स्थिर किया और फिर माइक्रोस्कोप की मदद से उसकी बायीं आंख को एथमॉइड साइनस से बाहर निकाला। न्यूरोसर्जरी, नेत्र रोग, ट्रॉमा और इमरजेंसी मेडिसिन और एनेस्थीसिया विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर इस सर्जरी को अंजाम दिया। सर्जरी के बाद युवक की आंखों की रोशनी वापस आ गई है। उसकी हालत स्थिर है।

क्या बोले नेत्र रोग एक्सपर्ट

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना शर्मा ने कहा कि ये एक अत्यंत जटिल मामला था। इसके लिए कई विभागों के विशेषज्ञों का सहयोग जरूरी था। मरीज की स्थिति गंभीर थी, लेकिन, बहु-आयामी दृष्टिकोण के कारण हम इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दे सके।

डॉक्टरों की इस उपलब्धि की हो रही सराहना

एम्स भोपाल के कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय सिंह ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि एम्स भोपाल में हम हमेशा सीमाओं से परे जाकर नई चुनौतियों का सामना करने में विश्वास करते हैं। यह मामला हमारे डॉक्टरों की प्रतिबद्धता और सहयोग की शक्ति का प्रमाण है। मैं अपनी टीम को हमेशा असाधारण सोचने और कुछ नया करने के लिए प्रेरित करता हूं।