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मास्टर प्लान में होने के बावजूद शहर से बाहर नहीं हुए कई खतरनाक उद्यम, रहवासी हो रहे परेशान

राजधानी की सेहत बिगड़ी: नए मास्टर प्लान में स्पष्ट पॉलिसी की जरूरत ताकि शहर की आबोहवा रहे साफ

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Master Plan

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भोपाल. मास्टर प्लान 2005 में खतरनाक और दुर्गंध वाले उद्यमों को रिहायशी क्षेत्रों से दूर शिफ्ट करने की योजना थी। सालों बाद और कई दौर की कवायद के बावजूद अधिकतर उद्यम शहर के अंदर जमे हुए हैं। इनमें से कई के लिए तो जगह चिह्नित कर दी गई थी। इनकी शिफ्टिंग नहीं हो पाने से नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर आरा मशीनें, स्लॉटर हाउस, हड्डी मिल, डिस्टलरी और स्ट्रॉ फैक्टरी को बाहर करने की बात मास्टर प्लान में थी। अब नए मास्टर प्लान में नागरिकों को उम्मीद है कि इन उद्यमों की शिफ्टिंग के लिए स्पष्ट नीति घोषित की जाएगी।

वर्ष 2005 के मास्टर प्लान में बताया गया है कि कबाड़ी बाजार, पशु प्रजनन केन्द्र, मंगलवारा एवं आजाद नगर सब्जी बाजार, रॉयल मार्केट वाहन मरम्मत केन्द्र आदि उद्यमों को पुनस्र्थापित किया गया है। हकीकत यह है कि कबाड़ी बाजार को शहर से अलग बनाया गया था, लेकिन इसके आसपास विकास होने से यह फिर से आवासीय इलाके के बीच में आ गया है। अब कबाड़ बाजार और कबाड़ गोदामों को भी बाहर करने की मांग उठ रही है।

सालों से इनके लिए बस योजनाएं ही बन रही हैं
आरा मशीन: लकड़ी भंडारण के कारण आग के खतरे व चिराई की तीखी आवाज के कारण आसपास के लोग परेशान हैं। चांदपुर में जमीन आवंटित है। वहां विकास नहीं होने से शिफ्टिंग नहीं हुई।
स्लॉटर हाउस: जिंसी स्लॉटर हाउस को एनजीटी ने शिफ्ट करने का आदेश दिया था। नगर निगम ने आदमपुर छावनी में जमीन चिह्नित कर ली, लेकिन शिफ्टिंग नहीं हो पाई। एनजीटी ने जिंसी के इसे बंद करा दिया। निगम ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेकर फिर शुरू कर दिया है।
हड्डी मिल: पुल बोगदा के पास चलने वाली हड्डी मिल को भी शिफ्ट नहीं किया गया। इसे प्लान में दुर्गंधपूर्ण उद्योग क्षेत्र में शिफ्ट करने की योजना थी। इसकी बदबू से भी लोग परेशान हैं।
डिस्टलरी: पुल बोगदा क्षेत्र में ही बनी इस डिस्टलरी को भी अभी तक नहीं हटाया गया है।
स्ट्रॉ फैक्टरी: छोला रोड पर स्ट्रॉ फैक्टरी को भी हटाने की प्लानिंग मास्टर प्लान में की गई थी।
भोपाल तेल मिल: जहांगीराबाद स्थित मिल को नई गल्ला मंडी के पास शिफ्ट करने की योजना थी।

ये भी परेशानी की वजह
-शहर से ट्रांसपोर्टर्स को बाहर करने कोकता में ट्रांसपोर्ट नगर बन गया पर कारोबार बंद नहीं हुआ।
- नए आरटीओ का कोकता में भवन बना है,पर शिफ्टिंग नहीं हुई।
-ऑयल डिपो जिन क्षेत्रों में थे, वे आवासीय क्षेत्रों से घिर गए हैं। उन्हें बाहर करने की जरूरत है।
-कबाड़ गोदाम में हर साल आग लगती है, जिसे बुझाना मुश्किल हो जाता है। इन गोदामों को शहर से बाहर करने की जरूरत है।

कुछ उद्यम ऐसे हैं जो शहर और उसके रहवासियों की सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं हैं। ऐसे उद्यमों का शहर से बाहर होना चाहिए। इसलिए इनके लिए स्पष्ट पॉलिसी मास्टर प्लान में होनी चाहिए।
डॉ. सुदेश बाघमारे, पर्यावरणविद